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राजभर जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग

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बेल्थरारोड। राज्यसभा सांसद सकलदीप राजभर ने केंद्र सरकार से भर-राजभर जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने के बाद भर-राजभर जाति के लोगों के आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
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राज्यसभा में दिए गए अपने वक्तव्य की जानकारी देते हुए सांसद राजभर ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश के पूर्वांचल के 25 जिलों में भर- राजभर जाति के लोग प्रमुख रूप से निवास करते हैं, लेकिन आजादी के 70 वर्षों के बाद भी इस जाति के लोगों का शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक विकास नहीं हो सका। समय-समय पर भर-राजभर जाति के प्रतिनिधि इसे अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा है कि देश में दबे कुचले लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए गैर बिरादरी, जातिवाद और परिवारवाद को समाप्त कर सबका साथ सबका विकास की परिकल्पना को साकार किया जाए। इससे भर-राजभर जाति के लोगों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। साथ ही विकास की उम्मीद भी जगी है। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देशित किया है कि भर- राजभर को अनुसूचित जनजाति को शामिल करने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रदेश सरकार और संबंधित मंत्रालयों को भर राजभर जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की, ताकि इस जाति के लोगों के सर्वांगीण विकास का सपना साकार हो सके।
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