बलिया। विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने यूजीसी 2026 न्यू रेगुलेशन लागू करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रतिनिधि को सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया है कि देश की उच्च शिक्षा संस्थाएं, जिन्हें समानता, बंधुत्व और सामाजिक न्याय का केंद्र होना चाहिए, वहां आज भी जातीय भेदभाव एक कठोर और घातक सच्चाई के रूप में मौजूद है। यह भेदभाव केवल प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि अंक देने, फेल करने, शोध रोकने, फेलोशिप रोकने, मानसिक उत्पीड़न, पदोन्नति रोकने और सामाजिक बहिष्कार के रूप में लगातार जारी है। उन्होंने रोहित वेमुला और पायल तडवी जैसे होनहार छात्रों की मृत्यु को व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि संस्थागत जातिवाद का परिणाम बताया।
उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत दलित-पिछड़े शिक्षक एवं कर्मचारियों को भी जातीय भेदभाव से सुरक्षा देने के लिए इस कानून को स्पष्ट रूप से लागू करने पर जोर दिया। इस मौके पर शैलेष धुसिया, साहनी वीरेंद्र निषाद, जय भीम भारती, राघवेंद्र कुमार, मनीष कुमार, अवधेश कुमार, बलवंत यादव आदि रहे।