गेहूं खरीद की समय सीमा शासन की ओर से 15 दिनों तक बढ़ाई गई थी जो 30 जून को समाप्त हो गई लेकिन खरीद में तेजी नहीं आई। गुरुवार को समय सीमा समाप्त हो गई और लक्ष्य के सापेक्ष कुल 15 फीसदी ही गेहूं की खरीद हो सकी। 15 दिनों में मात्र 203 क्विंटल ही खरीद हुई। इसका मुख्य कारण किसानों को गांव में ही समर्थन मूल्य के बराबर गेहूं का दाम मिलना बताया जा रहा है। 95 हजार मी. टन लक्ष्य के सापेक्ष कुल 14330 मी. टन की ही खरीद हुई है।
शासन के निर्देश पर जिले में एक अप्रैल से 42 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू हुई लेकिन तमाम प्रयास के बावजूद खरीद रफ्तार नहीं पकड़ सकी। एक माह तक खरीद में तेजी नहीं आने के बाद अधिकारियों की ओर से मोबाइल क्रय केंद्र की भी व्यवस्था की गई। कुल 53 क्रय केंद्र संचालित किए गए और किसानों की सूचना पर उन्हें घर जाकर गेहूं खरीदने की भी सुविधा दी गई। इसके बावजूद शासन की ओर से निर्धारित समय सीमा 30 जून तक जिले में निर्धारित 14127 मी. टन की ही खरीद हो सकी थी। बताया जाता है कि बाजारों में भाव करीब बराबर मिलने के कारण किसानों ने क्रय केंद्र के बजाए बाजारों में ही गेहूं को बेचना मुनासिब समझा।
बाजार में भाव बराबर होने का असर इस बार खरीद पर पड़ा। जबकि क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को हर सुविधा दी जा रही थी। अब तक कुल 3351 किसानों से 14330 मी. टन खरीद हुई है।
- अविनाश चंद्र सागरवाल, जिला विपणन अधिकारी, बलिया।