राहत और बचाव कार्य में लगी एनडीआरएफ की टीम
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गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा है, जिसके चलते मंगलवार को एनएच-31 के रामगढ़ भारतीय स्टेट बैंक के समीप और डेंजर जोन पचरूखिया मझौंवा के डेंजर जोन स्पर संख्या 17 के सामने बंधे की उत्तर दिशा में नदी का रिसाव शुरू हो गया। इस जानकारी होते ही ग्रामीणों ने जिलाधिकारी गोविंदराजू एनएस को इसकी सूचना दी। सूचना पर पहुंचे डीएम ने तत्काल बाढ़ विभाग के अधीक्षण अभियंता एके राय को रिसाव बंद करने का निर्देश दिया।
करीब चार की घंटे मशक्कत के बाद किसी तरह रिसाव पर काबू पाया जा सका। रिसाव की खबर सुनते ही बंधे की उत्तर दिशा में बसे दर्जनों गांवों के लोगों में हड़कंप मच गया। लोग अपने सामानों को बंधा टूटने के भय से अपने सामान व मासूमों को सुरक्षित ठौर व रिश्तेदार के यहां पहुंचाना शुरू कर दिए हैं। गंगा के हाई फ्लड लेवल पार करते ही चारों तरफ तबाही की दास्ता लिखनी शुरू कर दी है। अब तक का हालात यह रहा है कि तीन दशकों में खरबों रुपये खर्च कर दर्जनों स्पर व जीओ विधि के प्लेटफार्म बनाए गए। लेकिन न तो एनएच-31 और नहीं कोई गांव ही सुरक्षित हो सका।
अब तक दर्जनों गांव का अस्तित्व मिट गया। मंगलवार को भी हल्का कटान का असर चौबे छपरा, श्रीनगर व दूबे छपरा रिंग बंधे पर रहा। जबकि बाढ़ विभाग के अधिकारी दूबे छपरा रिंग बंधा कई जगह पर क्षतिग्रस्त है, जहां पर युद्धस्तर से बचाव व राहत कार्य जारी रखे हैं। अब गंगा का रुख अब केहरपुर की तरफ मुड़ गया है। जिसके केहरपुर के सभी लोग अपने घरों को खाली कर सुरक्षित ठौर देने में जुट गए हैं। गंगा के कटान से बेघर होकर एनएच-31 पर पचरूखिया से लेकर दूबे छपरा तक डेरा डाले हुए लोगों की हालत यह है कि प्रशासन की तरफ से न तो इनको कहीं भोजन की व्यवस्था कराई गई और न तो पशुओं के चारे की और ना ही कहीं हैंडपाइप लगाया गया है।