नोटबंदी के फैसले के बीच ददरी मेला अपने अंतिम दौर में चल रहा है। चार दिसंबर को समाप्त हो रहे इस मेले में लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। इससे यहां स्टाल लगाने वालों में कुछ राहत है। मेले में दूसरे जनपद से भी लोग पहुंच रहे हैं। मेले में मौत का कुंआ, चरखी, झूला लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
ऐतिहासिक ददरी मेले में बुधवार को सुबह से ही मेलार्थियों की भीड़ उमड़ने लगी। दोपहर तक मेला परिसर ठसाठस मेलार्थियों की भीड़ से भर चुका था। दूकानदारों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है। एक तरफ बच्चों की भीड़ चर्खी, झूला, मौत के कुंआ, जादूगर आदि से मनोरंजन किया। वहीं महिलाओं ने सजावटी व घरेलू सामग्रियों की ज्यादा खरीददारी की।
इसके अलावा मौसम के बदलते असर के कारण मेलार्थियों ने गर्म कपड़ों की भी खरीददारी की। क्राकरी, लकड़ी की नक्काशीदार व सजावटी सामग्रियों के साथ ही आर्टिफिशियल फ्लावरों आदि के दूकानों पर भी महिलाओं की भीड़ देरशाम तक उमड़ी रही। साथ ही मेले में खाने-पीने की वस्तुओं से सजी दूकानों पर भी मेला घूमने आए लेाग देरशाम तक लुत्फ उठाते रहे।