बलिया। ददरी मेले की सोमवार से शुरुआत हो गई। मेला क्षेत्र में नंदी ग्राम बसाया गया हैं जहां पशु पशुओं की बिक्री शुरू हो गई है। हालांकि अभी खरीदार कम आ रहे हैं लेकिन कुछ दिनों बाद पशुओं की खरीद फरोख्त तेज हो जाएगी। मेला क्षेत्र में अभी अपेक्षित व्यवस्था नहीं की जा सकी है। नगर पालिका प्रशासन की ओर से 55 अस्थायी शौचालय बनाए जाएंगें और 65 हैंडपंप लगेंगे। नपा चेयरमैन अजय कुमार का कहना है कि मेला का दूसरा दिन है। जल्द ही सभी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी।
मेला में पशुओं की खरीद बिक्री शुरू होने से नगर पालिका की आमदनी भी शुरू हो गई है। नंदी ग्राम मेला में बैल, गाय व बछड़ों की कई खेप पहुंच गई है। व्यापारियों ने जहां अपना डेरा तंबू खड़ा कर दिया है, वहीं नगर पालिका का मेला परिसर में कैंप कार्यालय लगभग तैयार हो गया है। पशु लेकर आए लोगों को उम्मीद है कि छठ के बाद जब बिहार के व्यवसायी मेला में आएंगे तो खरीद व बिक्री तेज होगी। उधर, नगर पालिका परिषद ने मेला में प्रकाश व पानी की सुविधा मुहैया करा दी है। कुछ स्थानों पर हैंडपंप लगाने का कार्य अभी चल रहा है। थाना पशु बाजार भी पूरी तरह तैयार है। मेला प्रभारी विवेक पांडेय ने सुरक्षा की कमान संभाली है। सोमवार को पहले दिन नंदी गांव के बैलहट्टा की कमाई 16 हजार हुई जबकि दूसरे मंगलवार को पशुओं की आवक होने से शाम चार बजे तक कमाई 70 हजार तक पहुंच गई। नगर पालिका के कैशियर अलीम खान ने बताया कि पहले दिन की कमाई से थोड़ी सी निराशा जरूर हुई लेकिन दूसरे दिन का व्यापार संतोषजनक रहा।
नगरपालिका अध्यक्ष अजय कुमार पांडेय ने बताया कि नंदी ग्राम पशु मेला में 55 शौचालयों का प्रबंध किया गया है। 65 अस्थायी हैंडपंप लगाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ी तो शौचालय की संख्या बढ़ा दी जाएगी। स्वच्छता के साथ मेला का संचालन हो, यही लक्ष्य है। मेले में पॉलिथीन की बिक्री पर रोग लगाई गई है। जो इसका इस्तेमाल करते पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
समय बीतने के साथ घटता गया नंदी ग्राम का क्षेत्रफल : बलिया। जिले के नंदी ग्राम पशु मेले की साख पूरे पूर्वांचल में है। वर्ष 2000 में मेला 113 से 120 एकड़ भूमि पर लगा था। कई प्रांत के पशु व्यापारी यहां आकर व्यापार करते थे। समय बीतने के साथ मेला क्षेत्र का क्षेत्रफल घटना जा रहा है। मेला क्षेत्र में जिस तरह प्लाटिंग का कार्य चल रहा है, उससे वह दिन भी दूर नहीं जब मेला सिर्फ सीमित क्षेत्र में ही सिमट कर रह जाएगा। नंदी ग्राम पशु मेले में कभी पंजाब, बंगाल, असम, ओडिसा, मध्यप्रदेश के व्यापारी आकर व्यापार करते थे। धीरे-धीरे परिस्थितियां व्यापारियों के प्रतिकूल होती गई। इससे मेले की रौनक फीकी पड़ने लगी। गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2000 में 113 एकड़ में पशु मेला लगाया गया था। इसके बाद वर्ष 2004 में 96 एकड़ में सिमट गया। वर्ष 2008 में 90 एकड़, 2011 में 86 एकड़, 2013 में 75 एकड़ और इस साल घटकर महज 70 एकड़ में सिमट गया। पिछले डेढ़ दशक में 43 एकड़ मेला के क्षेत्रफल में कमी दर्ज की गई है। सब कुछ जानने के बाद भी जिला प्रशासन इसे लेकर बहुत गंभीर नहीं है। अब पशु मेले में पहले जैसी रौनक नहीं दिखती है। बस औपचारिकताएं जिला प्रशासन द्वारा पूरी की जा रही हैं।
भू माफिया का है बोलबाला : बलिया। वह बात किसी और जमाने की थी, जब लोग इस जगह को महर्षि भृगु मुनि की तपोस्थली के बारे में जानते थे लेकिन मौजूदा समय इस स्थल पर भू-मऊाफिया का बोलबाला है। यहां प्लाटिंग होने जके बाद बने मकानों में अधिकांश का नक्शा पास नहीं है। ऐसा नहीं कि प्रशासिनक अधिकारी इससे अनजान हैं, लेकिन उदासीन रूख के चलते भू-माफिया का मनोबल बढ़ रहा है।
पांचवीं बार मेला प्रभारी बने विवेक : बलिया। पुलिस अधीक्षक देवेंद्र नाथ ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था की कमान उपनिरीक्षक विवेक पांडेय को सौंपी है। इन्हें मेला का प्रभारी बनाया गया है। गौरतलव हो कि लगातार पांच वर्षों से विवके पांडेय ही मेला की कमान संभाल रहे हैं। पिछले पांच साल से जिले में कई पुलिस अधीक्षक बदले, लेकिन मेला क्षेत्र की कमान संभालने के लिए सबकी पसंद विवेक पांडेय ही बने हुए हैं।
बोले व्यापारी
-प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने से रात में दिक्कत हो रही है। नगर पालिका की ओर से की गई प्रकाश की व्यवस्था नाकाफी है।-अनिल, पशु व्यापारी, बक्सर
-मेला क्षेत्र की जमीन समतल नहीं होने से परेशानी हो रही है। पेयजल की व्यवस्था है लेकिन मच्छरों का प्रकोप है। ऐसे में फागिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।-नंदजी, पशु व्यापारी, बक्सर
-मेले में इस साल बैलहट्टा का शुल्क ज्यादा है, एक जोड़ी पर 500 रुपये ज्यादा है। इस पर नगर पालिका प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। ताकि व्यापारियों को सहूलियत मिले।-छोटेलाल खरवार, पशु व्यापारी, रसड़ा
-मेेला में जमीन समतल न होने के कारण टेंट आदि लगाने में दिक्कत हो रही है। प्रकाश व्यवस्था का भी अभाव है।-पंचानंद पासवान, पशु व्यापारी, सिवान