कार्तिक की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर शुक्रवार को नगर के विभिन्न गंगा घाटों पर सनातन धर्मावलंबियों की भीड़ लगी। मंदिरों में भी भीड़ देखी गई। सुबह चार बजे से लेकर दिन के 12 बजे श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाते रहे। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी (देवोत्थान एकादशी) के नाम से भी जाना जाता है।
नगर के महावीरघाट, शिरामपुर घाट, कोरंटाडीह आदि पर अधिक भीड़ रही। इस दौरान घाट श्रद्धालुओं से पटे रहे। शाम को श्रीहरि विष्णु के साथ तुलसी का विवाह को विधि विधान से पुरोहित द्वारा संपन्न कराया गया। शाम को व्रती लोगों द्वारा श्रीहरि विष्णु एवं तुलसी के विवाह के लिए केले का मंडप बनाया गया। एकादशी के दिन गन्ने और नए गुड़ का सेवन भी किया गया।
नरहीं। एकादशी पर कोटवानारायणपुर, उजियार गंगा तट, भरौली गंगा घाट, बड़का खेत, पलिया खास गंगा तट, सोहांव गांव के सामने गंगा तट एवं इच्छा चौबे का पूरा गांव के सामने गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई।
रामगढ़। हल्दी थाना क्षेत्र के हुकुम छपरा घाट पर ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं का हुजूम गंगा घाटों पर उमड़ पड़ा। लोगों ने हरी प्रबोधिनी एकादशी पर आस्था की डुबकी लगाई। गंगा मैया के पूजन अर्चन करने के बाद लोगों ने दान पुन्य किए। लोगों के वाहन बेतरतीब ढंग से खड़ा होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही। स्थानीय पुलिस ने किसी तरह सड़क से जाम को हटवाया। कार्तिक मास की एकादशी पर शुक्रवार की भोर में ही श्रद्धालुओं का हुजूम गंगा नदी के हुकुम छपरा ,गंगापुर सुघर छपरा, गोपालपुर सहित अन्य घाटों पर स्नान करने के लिए उमड़ पड़ा । चौकी इंचार्ज रामगढ़ मिथिलेश तिवारी जाम छुड़ाने में लगे रहे। करीब 11 बजे के आसपास लोगों की भीड़ कम हो गई। इस दौरान गंगा घाटों पर नाव की भी व्यवस्था कराई गई थी। नवानगर में प्रबोधिनी एकादशी विभिन्न इलाकों में धूमधाम से मनाई गई।
देवउठनी एकादशी से ही शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
बलिया। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने की निंद्रा के बाद कार्तिक मास की एकादशी के दिन जागते हैं। इनके जागने के बाद से सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता है। इस दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को कन्या नहीं है और वह जीवन में कन्या दान का सुख प्राप्त करना चाहता है। तो वह तुलसी विवाह कर प्राप्त कर सकता है।