बलिया। धान की रोपाई के लिए पानी की जरूरत है लेकिन अधिकांश नहरें बदहाल होने के कारण किसान परेशान हैं। कई नहरों की सफाई व मरम्मत सही तरीके से नहीं होने के कारण टेल तक पानी नहीं पहुंचता है। हालांकि विभाग की ओर से हर साल नहरों के तल की सफाई करने का दावा किया जाता है।
जिले में कुल 1560343 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई के लिए कुल 274.936 किमी लंबी नहर, रजवाहा व माइनरों की जाल है। इसमें दोहरीघाट सहायक परियोजना की मुख्य नहर 62 किमी है। इस नहर के चार राजवाहा व 50 माइनर हैं, जिनकी कुल लंबाई 65.186 किमी है। दोहरीघाट सहायक परियोजना के मुख्य नहर समेत कुल 55 टेल हैं। इसके अलावा सुरहा ताल पंप नहर स्थापित है। इस नहर के मुख्य नहर की लंबाई जहां 11.8 किमी है वहीं इस नहर के कुल आधा दर्जन माइनरों की लंबाई छह किमी है। हालांकि यह पंप नहर सालों से सुरहा ताल में पानी के अभाव में बंद है।
करीब पांच साल पहले तक हर साल रबी व खरीफ फसलों के पूर्व नहरों की मरम्मत व तल सफाई का कार्य किया जाता था। लेकिन प्रदेश सरकार ने अब केवल रबी के पूर्व नहरों की मरम्मत व तल सफाई की व्यवस्था की है। तल सफाई का काम हर साल होता है लेकिन अधिकांश नहरों के टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। जबकि हर साल करीब एक करोड़ का खर्च होता है।
बतौर उदाहरण कोरंटाडीह पम्प नहर को देखा जा सकता है। इस नहर का टेल रामगढ़ गांव में निर्धारित है। करीब दो दशक से इस नहर का पानी टेल तक नहीं पहुंचता है। इसके अलावा अन्य कई नहरों की भी हालत खराब है।
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रबी के पूर्व सभी नहरों की मरम्मत व तल सफाई का कार्य कराया गया है। वर्तमान में पानी की डिमांड कम है लिहाजा कुछ नहरों में पानी का संचालन किया जा रहा है। डिमांड बढ़ने पर सभी नहरों का संचालन किया जाएगा। अधिकांश नहरों के टेल तक पानी पहुंचाने का काम किया जाएगा।
- सीबी पटेल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड प्रथम, बलिया।