बैरिया कसबा के बिल्डिंग मैटेरियल व्यवसायी अरविंद कुमार वर्मा ने बकाए रुपयों की वसूली के लिए खुद के अपहरण का स्वांग रचा। ताकि बकाएदार उसके पैसे जल्द लौटा दे। लेकिन मंगलवार को की शाम पुलिस ने उसे मांझी स्थित पुल के पास से पकड़ लिया। पुलिस ने कारोबारी का चालान कर दिया।
बैरिया एसओ संजय सिंह ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि कसबा निवासी व्यवसायी अरविंद वर्मा आठ सितंबर को जिला मुख्यालय गया था। इसी दौरान वह लापता हो गया था। उसने पत्नी को अपने ही फोन से अपहरण की जानकारी दी।
साथ ही 15 लाख फिरौती मांगने की बात बताई थी। पत्नी पूनम की तहरीर पर अपहरण का मुकदमा दर्ज िकया गया और स्वाट प्रभारी राजकुमार को इसमें लगाया गया था। मंगलवार की शाम पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि उक्त व्यापारी यूपी-बिहार सीमा पर स्थित मांझी पुल के समीप देखा गया है। वहां पहुंचकर बैरिया पुलिस और स्वाट टीम ने व्यवसायी को पकड़ लिया।
एसओ ने बताया कि व्यवसायी अरविंद वर्मा ने स्वीकार किया कि उसके 15 लाख रुपये मार्केट में बकाया है। जबकि सात से आठ लाख रुपये का कर्जदार वह स्वयं था। बकाया पैसा निकलवाने के लिए ये नाटक रचा। साजिश के तहत आठ सितंबर की देर शाम बक्सर होते हुए बाइक से ही धनबाद चला गया।
वहां एक रिक्शा चालक बद्री रजक से दोस्ती बढ़ाकर उसके साथ गिरीडीह जिले के अररिया गांव में रहने लगा। दो दिन पहले अपने गांव के लिए बाइक से निकला था। इसी बीच वह मांझी पुल के पास से पकड़ लिया गया। आरोपी को पकड़ने वाली टीम में स्वाट टीम के प्रभारी राजकुमार सिंह, कांस्टेबल अतुल सिंह, अरुण यादव, जगदीश मौर्या, विनय तिवारी, सजद खान आदि रहे।