जिले में कच्ची शराब का अवैध धंधा बेरोकटोक चल रहा है। जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। अभी बसंतपुर की घटना लोगों के जहन से उतरी नहीं है। जहां की बनी कच्ची शराब पीकर ग्राम प्रधानी चुनाव में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 26 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। बसंतपुर में करीब 10 वर्षों के दौरान करीब एक दर्जन मौतें हुई है। बावजूद जिला प्रशासन मौन साधे हुए है।
सुखपुरा थाना क्षेत्र के धरहरा गांव में ग्राम प्रधानी चुनाव के दौरान ग्राम प्रधान प्रत्याशियों ने मतदाताओं को पक्ष में करने के लिए बाटी-चोखा की दावत थी।
इस दौरान कच्ची शराब भी लोगों ने छक कर पिया था। शराब पीने के अगले दिन कुंदन प्रसाद गुप्ता, राम बिंद एवं केशव प्रसाद बिंदु की मौत हो गई। वहीं 26 लोग बीमार भी हो गए थे। इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अनीस अहमद ने सुखपुरा एसओ और हनुमानगंज चौकी इंचार्ज को निंलबित कर दिया था। बसंतपुर गांव में महेश सिंह, बेकारू सिंह, सत्येंद्र सिंह, शंकर सिंह, बटखरी सिंह, राजनाथ राम, जनार्दन राम, चंदू सिंह, चंदू बिंद, कामेश्वर सिंह, राजकुमार राम, गुड्डू साहनी, केशव राजभर समेत कई लोगों की मौतें हो चुकी है।
हालांकि तत्कालीन एसपी ने इस पर रोक लगा दी थी। लेकिन उनके स्थानांतरण होते ही यह धंधा पूर्व की तरह ही चलने लगा। आबकारी एवं पुलिस की टीम बसंतपुर में छापामारी कर भट्टियां नष्ट करते रहते हैं। बावजूद कारोबारियों पर कोई असर नहीं पड़ता है।