थाना क्षेत्र के बसुदेवा गांव में ताजिया जुलूस मार्ग को लेकर सोमवार को दिनभर दोनों समुदायों के बीच खींचतान चलती रही। इसका कोई समाधान नहीं निकलने पर कोर्ट के निर्देश पर निर्मित चहारदीवारी को पुलिस प्रशासन ने सोमवार की देर रात जबरिया गिरवा दिया। इसके बाद ताजियादारों ने बुधवार को पुलिस प्रशासन की देखरेख में ताजिया जुलूस निकाला। तत्पश्चात करबला में ताजिया को दफनाया।
वहीं पुलिस प्रशासन ने दीवार गिराने की बात को सीधा नकार दिया है। इसको लेकर गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बसुदेवा में ताजिया जुलूस अंजनी लाल श्रीवास्तव के सहन से होकर गुजरता था। जिसके विरुद्ध अंजनी लाल ने सिविल कोर्ट में 2002 में मुकदमा दाखिल किया था।
कोर्ट द्वारा पारित आदेश 30 सितम्बर 2014 के क्रम में अंजनी लाल ने चहारदीवारी घेर घेराबंदी कर लिया था। इस दौरान ताजिएदारों द्वारा विरोध नहीं किया गया था। लेकिन 10 अक्तूबर 2016 को ताजिएदार द्वारा पुराने मार्ग से जुलूस ले जाने की बात कही गई। पुलिस प्रशासन ने इसपर काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन ताजिएदार की जिद के कारण जिला व पुलिस प्रशासन ने चहारदीवारी को जबरिया गिरा दिया गया।
हालांकि प्रशासन दीवार तोड़े जाने की बात से इंकार कर रहा है। प्रत्यक्षदर्शियाें का कहना है कि सोमवार की देररात भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर सभी गलियों की नाकेबंदी कर दिया गया। इसके बाद विवादित दीवार को तोड़वा दिया गया। वहीं अंजली लाल का कहना है कि प्रशासन ने मेरे साथ नाइंसाफी कर कोर्ट की अवहेलना किया है। जिसे में कोर्ट में चुनौती दूंगा। पीड़ित जिला कलेक्ट्रेट में चपरासी के पद पर तैनात है।