बलिया। चित्तू पांडेय चौराहे से सटे रेलवे फाटक के केबिनमैन शैलेश तिवारी की हत्या छह फरवरी की रात बदमाशों ने राड से पीट-पीट कर दी। लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी अभी तक हत्यारों का कोई सुराग नहीं लगा है। पुलिस की कार्रवाई ढाक के तीन पात वाली हो गई है। मामले में जीआरपी पुलिस अधीक्षक ने पूर्व में जीआरपी प्रभारी यूके श्रीवास्तव को इस केस में उदासीनता बरतने पर लाइन हाजिर कर दिया था। इसके बाद यह कमान राजा भईया को दी थी। लेकिन राजा भईया को भी आए दो माह से अधिक समय हो गया। अभी तक कोई अहम सुराग नहीं मिला।
ज्ञात हो कि शहर के चित्तू पांडेय चौराहे के समीप स्थित रेलवे क्रासिंग पर तैनात केबिनमैन शैलेश तिवारी की छह फरवरी की रात अज्ञात बदमाशों ने राड से मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में सहायक स्टेशन मास्टर के तहरीर पर जीआरपी पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर छानबीन आरम्भ किया। लेकिन तीन माह से अधिक बीत जाने के बाद भी जीआरपी पुलिस मामले की गुत्थी सुलझाने में विफल रही है। इस मामले में नीले रंग के ई-रिक्शा चालकों को उठाया और पूछताछ की लेकिन सुराग नहीं मिला। अंत में जीआरपी पुलिस अधीक्षक ने जीआरपी प्रभारी यूके श्रीवास्तव को उदासीनता बरतने के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया था। तत्पश्चात राजा भईया को जीआरपी थाने पर तैनाती कर मामले की खुलासा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। लेकिन अब तक जीआरपी प्रभारी को भी कोई खास सफलता हाथ नहीं लग सकी। इस बाबत जीआरपी प्रभारी राजा भईया ने बताया कि मुकाम तक पहुंचने के बाद भी अभी असफलता ही मिली है। लेकिन हत्यारों तक पहुंचने का प्रयास जारी है।