बलिया। जिले में नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्राें में जगह-जगह विभिन्न कमेटियों द्वारा पंडाल बनाए जा रहे हैं। पंडाल निर्माण के लिए प्रशासन की तरफ से समितियों को दिशा निर्देशित किया गया है लेकिन कुछ समितियां इसकी अनदेखी कर रही हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है। सूती कपड़ा की बजाय सिंथेटिक व ज्वलनशील कपड़ाें का उपयोग पंडालों के निर्माण कार्य एवं सजावट में किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में कुछ पंडालों के पास से विद्युत तार गुजर रहे हैं। ऐसे में शार्टसर्किट से आग लगने से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन नगर में विद्युत तारों को बदल दिया गया है।
जिले के 22 थाना क्षेत्रों में 622 स्थानों पर पंडाल स्थापित किए जा रहे है। लेकिन पूजा समितियां सुरक्षा को ठीक से पूरा नहीं कर रही है। उधर, विद्युत विभाग ग्रामीण इलाकों के जर्जर तारों को बदलवा नहीं सका है। यह तार पंडालों के पास से होकर गुजर रहे हैं। जिससे किसी भी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों की पंडाल की बात की जाय तो सुरक्षा की व्यवस्था औपचारिकता मात्र ही पूरी होती है। हालांकि नगर पूजा कमेटियों द्वारा जिला प्रशासन और अगिभनशमन विभाग द्वारा दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश के तहत कार्य कर रही है। लेकिन नगर की अधिकांश कमेटियां सड़क पर ही पंडाल बनाने का काम किया है। जबकि उन्हें सड़क छोड़कर ही पंडाल बनाने का पहले से निर्देश जारी है। ताकि आवागमन बाधित न हो सकें। हालांकि दशहरा के दौरान ऐततियात के तौर पर पुलिस महकमा द्वारा बड़े वाहनों को नगर के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। जिससे पंडाल के पास से छोटे वाहनों को ले जाने में कोई खास दिक्कतें नहीं होती है। इस बाबत विद्युत वितरण खंड द्वितीय के एक्सईएन हरिशंकर ने बताया कि नगर में जर्जर तार को बदलकर नया तार लगा दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पंडाल के पास से विद्युत तार गुजर रही है। उसे बदला जा रहा है।
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सुरक्षा के मद्देनजर रखा जाता है ध्यान
बलिया। दुर्गा पूजा कमेटी ओक्डेनगंज के अनुसार, पूजा पंडाल बनाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्य किया जाता है। इस दौरान फायर सिलेंडर, बालू, बाल्टी के साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी रखा जाता है। ताकि आग की घटना के समय तत्काल उस पर काबू पाया जा सकें।
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मानक पूरा न करने पर होगी कार्रवाई
बलिया। अगिभनशमन के प्रभारी कन्हैया यादव ने बताया कि सभी पूजा समितियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिया गया है। जिसमें सूती कपड़ा से पंडाल का निर्माण, फायर सिलेंडर, बाल्टी, ड्रम में पानी, बालू आदि रखना शामिल है। इसके अलावा पंडाल निर्माण सिंथेटिक व ज्वलनशील सामग्री का प्रयोग न करें तथा पंडाल को दिवाल या बाउंड्री से सटाकर न बनाए। पंडाल से निकलने के रास्ते को बाधित न करें तथा पंडाल से सटाकर रसोई की स्थापना न करें। बिजली के तारों व जोड़ों को खुला में न छोड़े। बिजली के लाइन के नीचे किसी भी दशा में पंडाल न बनाए। पंडाल से सटाकर हाइलोजन न लगाएं। बिजली की वायरिंग पंडाल से सटाकर न करें तथा अगिभन कार्य के लिए रखे पानी का प्रयोग दूसरे प्रयोग में न करें। आतिशबाजी का प्रयोग अंदर या बाहर न करें तथा पंडाल के अंदर व बाहर ध्रूमपान न करें। कहा कि मानक को पूरा न करने वाले पूजा कमेटियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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पंडालाें के पास नहीं रहती पार्किंग की व्यवस्था
बलिया। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में पंडाल को सजाया जा रहा है। लेकिन उसके आसपास पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं की जाता है। खासतौर पर यह समस्या नगर में और देखने को मिलती है। जिसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बावजूद न तो पूजा कमेटी और न ही जिला प्रशासन कोई पार्किंग की व्यवस्था करती है। नगर के प्रमुख पूजा पंडालों में शास्त्री नगर गड़हा मुहल्ला, जापलिनगंज, कासिम बाजार, गुदरी बाजार, चौक, सुतरपट्टी रोड, आर्यसमाज रोड, लोहापट्टीरोड, चमनसिंह बागरोड, महावीर घाट, ओक्डेनगंज, चित्तू पांडेय चौराहा, गांधीनगर आदि शामिल हैं।