बलिया। सीमावर्ती इलाकों में बिहार से तस्करी का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। खासकर नरही थाना क्षेत्र में दिन हो रात तस्कर बेलगाम हैं। भरौली गंगा पुल के रास्ते जहां पशु व अनाज को बिहार भेजा जाता है, वहीं बिहार से कोयला, लाल बालू, तेंदूपत्ता आदि की तस्करी इधर होती है। इसके अलावा गंगा के दियरांचल इलाका में नाव से शराब की तस्करी जोरों पर है।
नरही थाना के भरौली गंगा पुल का रास्ता तस्करों के लिए मुफीद साबित हो रहा है। बिहार के बक्सर से इस रास्ते दिन हो या रात तस्करी होती है। इधर से अनाज, शराब, पशु आदि का बिहार में तस्करी होती है। वहीं बिहार से रेडीमेड, कोयला, सरिया, लाल बालू, तेंदूपत्ता आदि इस पार लाया जाता है। इससे राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है। सूत्रों की माने तो प्रतिदिन दो करोड़ से ज्यादा के सामना इधर से उधर होते हैं। पुल पर बड़े वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित करने के लिए लोहे की बैरीकेडिंग लगाई गई है। लिहाजा तस्करों ने मिनी ट्रकों की ऊंचाई ही कम कर दी ताकि आसानी से आया-जाया किया जा सके। तस्करी के धंधे में सबसे ज्यादा मांग शराब की है। गंगा का दियरांचल इलाका अवैध शराब के कारोबार की लिए मुफीद बना है। हरियाणा, चंडीगढ़ आदि जगहों से कंटेनर में भरकर शराब यहां लाई जा रही। फिर यहां से पैकिंग कर लग्जरी वाहनों से बड़काखेत के दियरा में पहुंचा दिया जाता है जहां से इसे नाव से बिहार में भेज दिया जाता है।
दुबहर संवाददाता के अनुसार थाना क्षेत्र के शिवरामपुर घाट पर आए दिन नदी के रास्ते शराब की तस्करी की जाती है। सूरज ढलते ही तस्कर अवैध तरीके से नावों आदि के जरिए शराब को बिहार ले जाने का काम शुरु कर देते हैं। बताया कि अधिकांश तस्कर फलों व सब्जियों में शराब को छिपाकर ले जाते हैं। इसके अलावा शिवपुर दीयर नई बस्ती गांव में भी अर्जीनिया के तस्करी का धंधा जोरों पर है।