बलिया। वन विभाग ने अवैध तरीके से लाल बालू लेकर आ रहे वाहन को शनिवार को सीज कर दिया। कार्रवाई के लिए उसे कोरंटाडीह पुलिस के हवाले कर दिया गया। अमर उजाला के लगातार खुलासे के बाद विभाग ने उक्त कार्रवाई की है। दो दिन पहले ही डीएफओ ने अवैध तरीके से आ रहे लाल बालू पर जुर्माना राशि वसूली पर रोक लगाते हुए प्रवर्तन दल की तैनाती की थी।
जनपद के बैरिया व भरौली प्रांतीय सीमा के रास्ते प्रदेश में लाल बालू लाया जाता है। बिहार के कोईलवर में लाल बालू का सबसे बड़ा खदान है और यहां से भरौली की सीमा सबसे नजदीक होने के कारण बालू माफिया इसी रास्ते को पसंद करते हैं। 2012 में वैट लागू होने पर चेकपोस्ट हटाकर प्रवर्तन दल की तैनाती की गई थी। 12 मई 2014 को भरौली-बक्सर गंगा पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने पर वन विभाग ने प्रवर्तन दल को हटा दिया। वन विभाग ने कागजों पर पुल को बंद तो दिखाया लेकिन भरौली सीमा पर वनकर्मियों की तैनाती होती रही और तीन सालों में करोड़ों के राजस्व का गोलमाल होता रहा। जब इसका खुलासा हुआ तो आजमगढ़ के वन संरक्षक आरसी झा ने जिले में पड़ताल की थी। दो दिन पहले डीएफओ ने लाल बालू की आवक को अवैध कहते हुए आवक पर रोक लगाते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया। शनिवार को बिहार की ओर से आए पिकअप की जांच रेंजर ने की तो बालू लदा था लिहाजा गाड़ी को सीज कर दिया।
कोट
भरौली सीमा पर स्थित गंगा पुल मरम्मत के लिए भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित है। छोटे वाहनों से लाल बालू लाना पूरी तरह अवैध है। रेंजर की ओर से एक लाल बालू लदे एक पिकअप को सीज किया गया है।
राम अवतार सिंह, डीएफओ