रामगढ़। हल्दी थाना क्षेत्र मझौवां गांव के गंगा घाट पर बुधवार की सुबह लगभग नौ बजे स्नान करने गये दो किशोर अचानक गहरे पानी में डूब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण व पुलिस के जवान मौके पर पहुंच गये। गोताखोरों की मदद से डूबे किशोरों की तलाश शुरू की गई। घंटों बाद दोनों किशोरों का शव बरामद हो गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए भेज दिया।
हल्दी थाना क्षेत्र के मझौवां गांव निवासी आशीष 12 पुत्र ददन गोंड़ तथा नीरज 15 पुत्र लल्लन बुधवार की सुबह गांव के सात-आठ दोस्तों के साथ प्रतिदिन की भांति गंगा स्नान के लिए मझौवा घाट पर गए। स्नान करते वक्त आशीष व नीरज गहरे पानी में चले गए और डूब गए। इस दौरान उनके दोस्तों ने शोर मचाया। शोर सुनकर नहा रहे अन्य लोगों के साथ मछुआरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनका पता नहीं चला। किशोरों के डूबने की जानकारी होते ही मौके पर सैकड़ो लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही हल्दी थानाध्यक्ष सत्येंद्र राय हमराहियों व गोताखोरों संग मौके पर पहुंचे। गोताखोरों के घंटों प्रयास के बाद दिन में लगभग एक बजे दोनों का शव बरामद हो गया। उसे पुलिस ने कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए भेज दिया।
मृतक आशीष कक्षा सातवीं तथा नीरज नौवीं कक्षा का छात्र था। एक ही घर के दो बच्चों के डूबने से हुई मौत के बाद गांव में कोहराम मच गया। मृतक आशीष के माता-पिता इस समय घर पर मौजूद नहीं हैं। वे अपने पुत्र का अंतिम दर्शन भी नहीं कर सकेंगे। आशीष और नीरज के दादा-दादी व बहनों का रोते रोते बुरा हाल है। मृतक की बड़ी बहन बार-बार यह कहते हुए अचेत हो जा रही थी कि %हमरा भाई के लौटा दीं ए गंगा मईया, हम अपना मम्मी पापा के का मुंह देखाईब%।
बेटे आशीष का शव भी नहीं देख पाएंगे माता-पिता
रामगढ़। हल्दी थाना क्षेत्र के मझौवां गांव निवासी श्रीराम गोंड के दोनों पुत्र ददन गुजरात तथा लल्लन गोंड राजस्थान में किसी कंपनी में काम करते हैं। ददन की पत्नी अपने बच्चों को छोड़कर भाइयों के यहां इलाज कराने के लिए दिल्ली गई हुई है। जबकि लल्लन की पत्नी घर पर ही है। ददन व उसकी पत्नी के साथ ही लल्लन लाकडाउन के कारण जहां हैं वहीं फंसे हुए हैं।
ददन का पुत्र आशीष अपने तीन बहनों अंजली 18, शिवानी 16 व अंशिका 10 के बीच इकलौता भाई था। आशीष व उसकी सभी बहनें दादा-दादी के साथ ही रह रही थीं। लॉकडाउन के चलते आशीष के माता-पिता को पुत्र का अंतिम दर्शन करना भी सम्भव नहीं दिख रहा है। आशीष के डूबने के बाद ददन के घर का चिराग सदा के लिए बुझ गया।
आशीष क्षेत्र के मदर टेरेसा स्कूल में कक्षा 7वीं में पढ़ता था। कक्षा में होनहार छात्र के रूप पहचान बनाने वाले आशीष की मौत ने गांव सहित विद्यालय परिवार को भी झकझोर कर रख दिया है। मृतक आशीष के डूबने की सूचना जैसे ही पिता ददन गोंड व माता रिंकी देवी को मिली, उनका रोते-रोते बुरा हाल हो गया। मृतक नीरज तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। इसके दो भाई अंकुश 14 व अंकित 12 वर्ष के हैं। आशीष की तरह नीरज भी मदर टेरेसा का विद्यार्थी था और अपनी कक्षा में अत्यंत होनहार था। इस हृदय विदारक घटना ने पूरे विद्यालय परिवार, गांव और क्षेत्रीय लोगों को झकझोर दिया है। नीरज गोंड के पिता लल्लन गोंड़ राजस्थान में नौकरी करते हैं जो इस समय लाकडाउन में फंसे हुए हैं। बेटे के डूबने की सूचना जैसे ही उन्हें फोन से मिली। वे दहाड़े मारकर रोने लगे। बेटे नीरज का शव देखकर गंगा घाट पर ही माता रेनू देवी दहाड़े मारकर रोने लगी।