बलिया। अतिरिक्त सिविल जज (सीडी) संजय कुमार गोंड की अदालत ने 16 वर्षों से लंबित भुगतान के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। सीडी की अदालत ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी के खाते पर रोक लगाने का आदेश कोषाधिकारी को दिया है।
राजकुमारी देवी ने जिला महिला अस्पताल में नसबंदी कराई । इसके बावजूद वह गर्भवती हो गईं और बेटी पैदा हुई। उन्होंने इसी नसबंदी में लापरवाही माना। स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ 2008 में क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए वाद दाखिल किया। राजकुमारी देवी बनाम राज्य में कई बार अदालत की ओर से निर्देश दिए जाने के बावजूद विभाग की ओर से भुगतान नहीं किया गया। अदालत में प्रस्तुत अभिलेखों से स्पष्ट हुआ कि वादी को देय राशि खाते में नहीं की गई।
न्यायालय ने 2,79,239 रुपये की देय धनराशि के भुगतान में हुई देरी पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि विभाग से न तो कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया गया और न ही भुगतान रोके जाने का कोई वैध कारण प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने वरिष्ठ कोषाधिकारी बलिया को निर्देशित किया कि 18 नवंबर 2025 तक पूरे भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही चेतावनी दी कि निर्धारित समय में भुगतान न होने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पत्रावली की कार्रवाई के लिए 29 नवंबर को पेश हों। अदालत के इस आदेश के बाद लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रही वादी को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। वहीं विभागीय लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है।