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खाद्यान्न घोटाले में तत्कालीन तीन सीडीओ पर चलेगा भ्रष्टाचार का केस

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बलिया। 13 पहले जिले में हुए करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले का एक-एक जिन्न बाहर आने लगा है। घोटाले की जांच ईओडब्लू (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) व सीबीआई ने अलग अलग की थी। सरकार ने घोटाले के आरोपी तत्कालीन तीन सीडीओ पर भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। हालांकि तीनों सीडीओ सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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जिले में वर्ष 2002-03 से वर्ष 2005-06 के बीच संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले का मामला सामने आया। वर्ष 2005 में तत्कालीन सीडीओ की रिपोर्ट पर शासन ने सीबीसीआईडी जांच का आदेश दिया। इसके बाद सीबीसीआईडी ने 17 ब्लॉकों में हुई गड़बड़ी को देखते हुए अलग-अलग थानों में कुल 51 मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इन मुकदमों में 2002-03 से वर्ष 2005-06 के बीच रहे सभी सीडीओ, पीडी, डीडीओ, बीडीओ, तहसीलदार, पूर्ति निरीक्षक, ट्रांसपोर्टर, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव आदि समेत कुल 6055 अधिकारियों व कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया। जांच शुरू होते ही जिले में हड़कंप मच गया और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा। इसके बाद इस जांच को शासन ने ईओडब्लू को दे दी। इसी बीच जिले के कुछ लोगों ने इस घोटाले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने आठ मुकदमों को अपने अधीन लेते हुए जांच शुुरू कर दी। उधर, ईओडब्लू वाराणसी की ओर से जांच की गई और कुछ मामलों की जांच आज भी जारी है। अधिकांश मामलों की जांच की जा रही है। ईओडब्ल्यू ने माना कि खाद्यान्न वितरण की जिम्मेदारी सीडीओ व अन्य अधिकारियों को दी गई थी। ईओडब्लू ने 21 जून 2002 से 14 अक्तूबर 2003 तक सीडीओ रहे राममूर्ति राम, 18 फरवरी 2004 से 11 अक्तूबर 2004 तक सीडीओ रहे अश्वनी कुमार श्रीवास्तव व 11 अक्तूबर 2004 से चार दिसंबर 2004 तक सीडीओ रहे दीनानाथ पटवा को अनियमितता में दोषी पाया गया और माना कि तीनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 477, 120बी/34 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के तहत दंडनीय का अपराध बनता है। इस मामले में तीन तत्कालीन सीडीओ के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
ईओडब्ल्यू वाराणसी के इंस्पेक्टर केएम मिश्र ने बताया कि शासन ने बलिया के खाद्यान्न घोटाले में दोषी मिल तत्कालीन तीन सीडीओ पर भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाने के लिए अनुमति दे दी है। अब इनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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