बलिया। अब इसे कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव का असर कहें या फिर कुछ और लेकिन यह कड़वी सच्चाई है। वर्ष 2020 में चली कोरोना की पहली लहर में जिले में मरने वालों की तादाद उतनी नहीं हुई, जितनी इस वर्ष कोरोना की दूसरी लहर में जिले के लोगों ने जान गंवाई। यही कारण है कि इस वर्ष महज दो महीने यानी मार्च और अप्रैल में स्वास्थ्य विभाग में मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वालों की लंबी फेहरिस्त है, जो कोरोना के कहर की हकीकत बयां कर रही है। ऐसा नहीं कि मरने वाले केवल कोरोना संक्रमित ही है। इसमें दूसरी अन्य गंभीर बीमारियों से मरने वालों की तादाद भी शामिल है लेकिन महामारी काल में लोगबाग इसे कोरोना के प्रकोप से ही जोड़ कर देख रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष मार्च, अप्रैल और मई माह में तकरीबन चार सौ लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया था। इस बार मार्च, अप्रैल और मई (अब तक) में यह आंकड़ा 621 के पार पहुंच गया है। आलम यह है कि दूसरे फेज में मरीजों की संख्या काफी बढ़ रही है और मृत्यु दर भी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2020 में मरीजों की संख्या और मृत्यु दर काफी कम थी। जानकार इसका प्रमुख कारण कोरोना के दूसरे फेज का नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में पांव पसारना मान रहे हैं। कोरोना का कहर करीब एक साल पहले शुरू हुआ था। 16 अप्रैल 2020 तक जिले में कुल 16113 सैंपलिंग हुई थी, जिसमें औसत 25 से 46 तक पॉजिटिव मिलते थे। फरवरी 2021 तक कुल 7223 संक्रमित मिले थे। जबकि 106 की मौत हुई थी। कुल सैंपलिंग 284567 हुई थी, इसमें 276658 निगेटिव थे। इसके बाद से रिपोर्ट आनी बंद हो गई थी। लेकिन दूसरी लहर का असर जिले में होली बाद से शुरू हुई है। जिसका असर यह है कि इस वर्ष केवल अप्रैल माह में 236 लोग काल के गाल में समा गए। इतना ही नहीं मई माह के पहले पखवारे में यह आंकड़ा 311 पर पहुंच गया। जबकि अभी एक मई का दूसरा पखवारा बाकी है।
वर्ष 2020- 2021
मार्च 35- 74
अप्रैल 110- 236
मई 198- 311(अब तक)
नोट- मरने वालों का आंकड़ा (लगभग में)
कोरोना के दूसरी लहर के ज्यादा प्रभावी होने के कारण इस वर्ष मरने की तादाद में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि कोरोना संक्रमितों के मुक्कमल इलाज के लिए सारी सुविधाएं विभाग की ओर से मुहैया कराई जा रही है। - डॉ बीपी सिंह, सीएमएस, बलिया