लालगंज। क्षेत्र के दलन छपरा गांव के पंचायत भवन पर मंगलवार को चकबंदी आयुक्त के निर्देश पर अधिकारियों ने चौपाल लगाई। इसमें किसानों की समस्याओं को सुना गया और उसके निस्तारण का भरोसा देते हुए जल्दी ही प्रक्रिया पूरी कर धारा 52 के प्रकाशन का भरोसा दिया गया।
दलन छपरा मौजे में लगभग 37 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन आज तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इससे किसानों के सामने अनेक समस्याएं खड़ी होती रहती है। कई मामले उच्च न्यायालय में पहुंच जाते हैं। इसे संज्ञान में लेते हुए चकबंदी आयुक्त ने मुख्यालय लखनऊ से डीडीसी आलोक कुमार और एसओसी परवेज आलम अंसारी की दो सदस्यीय टीम को जिले में भेजकर यह देखने को कहा कि क्या कारण है कि इस गांव की चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। टीम ने सोमवार को जिले पर अभिलेखों की जांच की, साथ ही मंगलवार को टीम अपने साथ डीडीसी बलिया मातादीन मौर्य, एसओसी बलिया नरेंद्र सिंह, एसीओ डॉ. सुरेंद्र कुमार यादव, लेखपाल दिनेश कुमार, अजय कुमार, अजित सिंह, कुंवर गौतम को साथ लेकर गांव में चौपाल लगाई। किसानों से भी सहयोग मांगा। ग्रामीणों ने अवगत कराया कि इस गांव में 67 एकड़ जमीन नवीन परती की होते हुए भी किसी भी सरकारी कार्य के लिए जमीन नहीं मिलती है। कुछ लोगों ने उक्त भूमि को अपने नाम कराकर बंदरबांट की है। इसे निकालना जनहित में है। किसानों ने अपनी समस्याएं सुनाईं। इसमें पैमाइश, चक आपत्ति व पहले के चकबंदी कर्मियों द्वारा चक में हेरफेर करने का मामला आया। इस पर लखनऊ से आए डीडीसी आलोक कुमार ने एसओसी बलिया से कहा कि इस तरह के मामले चौपाल में सुनें। ऐसे मामले में स्वतः संज्ञान लेकर किसानों की मदद करनी चाहिए। साथ ही किसानों को भरोसा दिया कि अब लेखपाल प्रत्येक दूसरे व चौथे शनिवार को पंचायत भवन पर एक घंटे बैठेंगे। उनसे नकल ले सकते हैं व दाखिल खारिज का प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। अभिलेखों में सुधार की अभी गुंजाइश है। सभी आपत्तियों के निस्तारण कर छह महीने के अंदर धारा 52 का प्रकाशन कराने के लिए प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर पूर्व प्रधान भरत सिंह, अरुण पांडेय, अजब नारायण सिंह, संतोष सिंह, सोनू सिंह, सागर शुक्ल, ओमप्रकाश शुक्ल, बृजमोहन सिंह, उधव सिंह मौजूद रहे।