मनरेगा योजना के नाम बदलने के विरोध में श्रमदान करते कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक साथ में सि
- फोटो : महसी के बसौनामाफी में वन विभाग द्वारा पकड़ा गया बाघ।
बलिया। सिकंदरपुर विधानसभा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रविवार को जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक के नेतृत्व में श्रमदान कर मनरेगा योजना का नाम बदलने का विरोध किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सिर पर मिट्टी ढोकर कार्यालय परिसर में भराई की।
इस मौके कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने कहा कि सरकार मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी राम जी कर रही है, जो उचित नहीं है। महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता हैं।
उनके नाम की योजना को बदलना राष्ट्रपिता का अपमान है। 2005 में मनमोहन सरकार ने मनरेगा को लागू करके गांव से पलायन रोकने और बेरोजगारी समाप्त करने का प्रयास किया। लेकिन केंद्र सरकार गांवों से लोगों का पलायन चाहतीं है। भाजपा चाहती है कि लोग अपने परिवार से दूर रहें और कम मजदूरी पर काम करके पूंजीपतियों के लिए काम करते रहें। श्रमदान करने वालों में प्रमुख रूप से सिद्धनाथ तिवारी, अमरनाथ राम, अनिल पांडेय,वंश बहादुर, राजेश कुमार राय, राजेन्द्र चौधरी, अरुण श्रीवास्तव आदि रहे।
उधर फेफना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक त्रिकालपुर में हुई। कार्यकर्ताओं ने मनरेगा योजना का नाम बदलने का विरोध किया। जैनेंद्र पांडेय ने कहा कि भाजपा सरकार ने महात्मा गांधी के नाम संचालित योजना का नाम बदलकर कुठाराघात किया है।
बैठक की अध्यक्षता सुनील कुमार तथा संचालन जीशान जावेद ने किया। हीराराम पूर्व प्रधान, गंगेश्वर सिंह, कृपा शंकर उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
मनरेगा योजना के नाम बदलने के विरोध में श्रमदान करते कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक साथ में सि- फोटो : महसी के बसौनामाफी में वन विभाग द्वारा पकड़ा गया बाघ।