जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा मिले इसके लिए सीएमएस डॉ. एसके यादव 24 घंटे में आठ बार से अधिक इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड का मुआयना करते हैं। इसके बावजूद धरातल पर व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इमरजेंसी कक्ष और वार्ड में तैनात वार्डबॉय और सफाईकर्मी ड्यूटी के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। इनकी लापरवाही का खामियाजा दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उठाना पड़ रहा है। वार्डबॉय के न रहने से घायल मरीजों की समय से मरहम पट्टी तक नहीं हो पा रही है। इलाज के लिए अकेले आने वाले मरीज वार्ड में भर्ती नहीं होकर घंटों तक इमरजेंसी में पड़े रहते हैं। अस्पताल प्रशासन सबकुछ जानने के बाद भी मूकदर्शक बना हुआ है।
मरीज के साथ तीमारदार हैं तो वो मरीज को वार्ड तक लेकर चले जाते हैं। यदि मरीज अकेले है तो वो वार्ड में कब पहुंचेगा इसका कोई ठिकाना नहीं है। माइनर ओटी में साफ-सफाई नहीं हो पा रही है। चिकित्सकों के साथ मरीजों को तमाम परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। मरीजों को वार्ड में भर्ती करने, कंबल देने सहित तमाम काम वार्ड बॉय संभालते हैं। अस्पताल में पद के सापेक्ष आधे वार्ड बॉय तैनात होने से अस्पताल प्रशासन कार्रवाई करने से बचता है। इससे इनका मनोबल बढ़ा हुआ है।
गड़वार थाना के कुरेजी गांव निवासी बच्चिया देवी के पति बलि सिंह (65) सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप घायल हो गए। आसपास के लोगों की मदद से 108 एंबुलेंस से इमरजेंसी में इलाज कराने पहुंची। चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देख भर्ती कर दिया। बच्चिया देवी अकेले होने के कारण घायल पति को स्ट्रेचर से नहीं ले जा पा रही थी। ड्यूटी पर तैनात वार्डबॉय गायब थे। करीब दो घंटे बाद बाद वार्डबॉय के न आने पर ईएमओ ने दूसरे तीमारदार से घायल को हड्डी वार्ड में पहुंचवाया।
- इमजेंसी कक्ष में दोपहर दो बजे सहतवार थाना के छितौनी गांव निवासी एक युवती का इलाज चल रहा था। विषाक्त पदार्थ का सेवन करने से उसकी हालत खराब थी। ईएमओ डाॅ. संतोष सिंह ने इलाज के बाद वार्ड में भर्ती होकर आगे का इलाज की सलाह दी। मां अकेले होने के कारण स्ट्रेचर पर बेटी को ले जाने में असमर्थ थी। करीब डेढ़ घंटे तक बेटी को वार्ड में ले जाने के लिए परेशान थी। पता चला की वार्डबॉय अभी तक डयूटी पर नहीं आया है। वही वार्ड में भर्ती कराने ले जाएगा। चिकित्सक से इसकी शिकायत करने पर एक बाहरी युवक ने स्ट्रेचर पर लादकर युवती को मेडिकल वार्ड में भर्ती करवाया, वहां इंजेक्शन आदि चढ़ाया गया।
रात में भी नहीं रहते हैं वार्डबॉय
वार्डबॉय नहीं आने के कारण दुर्घटना में घायल अन्य मरीज मरहम पट्टी करवाने के लिए परेशान दिखे। वहीं बगल के इमरजेंसी कक्ष में सुबह के समय कोई वार्डबॉय तैनात नहीं था। नर्स ने बताया की रात में वार्डबॉय न रहने से मरीजों की देखभाल के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कभी-कभी पैरामेडिकल छात्राओं को मदद के लिए रखना पड़ता है।
इमरजेंसी में तीनों शिफ्ट में वार्डबॉय व स्वीपर की ड्यूटी लगती है। अगर कोई ड्यूटी पर नहीं आता है तो ईएमओ को शिकायत करनी चाहिए। मामले की जांच के बाद कार्रवाई होगी।
डाॅ. एसके यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल।