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पांच आरोपियों में से एक को सीएमओ ने बचाया

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बलिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा एनआरएचएम में फर्जी तरीके से हस्ताक्षर और पासवर्ड बनाकर करोड़ों रुपए का भुगतान करने के मामले में नवंबर 2019 में कोतवाली में पांच लोगों के विरुद्ध केस दर्ज कराया गया। आरोप है कि इसमें एक आरोपी को सीएमओ ने जानबूझकर विवेचना से बाहर निकलवा लिया ताकि इन्हें जेल ना जाना पड़े। जबकि चार आरोपी वर्तमान में गबन के आरोप में कारागार में निरुद्ध हैं। शिकायतकर्ता हरेंद्र नाथ तिवारी की ओर से डीएम के यहां की गई शिकायत के अनुसार सीएमओ कार्यालय में तैनात मनोज यादव कनिष्ठ लिपिक द्वारा अपने समय के सभी फाइलों पर हस्ताक्षर किया गया था। सीएमओ द्वारा भी सभी ़फर्मों को भुगतान किया गया था।
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जेम पोर्टल की आड़ में करोड़ों रुपये की भी धोखाधड़ी की गई। इसके बाद भी सीएमओ द्वारा कनिष्ठ लिपिक को सीएमओ कार्यालय का चार्ज दे दिया गया। वह वर्तमान समय में सीएमओ कार्यालय में तैनात है। सबसे बड़ी बात यह है कि सीएमओ कार्यालय द्वारा 2012 से कोई टेंडर हुआ ही नहीं है तो फर्मो को कैंसे भुगतान कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने डीएम से पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। अगर सही रूप से किसी सक्षम अधिकारी द्वारा पूरे प्रकरण की जांच करा दी गई तो इसमें सीएमओ सहित कई लोगों पर गाज गिर सकती है। मालूम हो कि कैबीनेट मंत्री/ जिला प्रभारी मंत्री अनिल राजभर भी दिसंबर 2019 में बलिया के स्वास्थ्य विभाग के एनआरएचएम की उच्चस्तरीय जांच एवं कार्रवाई के लिए पत्रक लिख चुके है। बता दे कि तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा एक लाख से अधिक के भुगतान के त्रिस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। जिसमें एसडीएम बैरिया, नगर मजिस्ट्रेट व वरिष्ठ कोषाधिकारी नामित थे। इस समिति के अनुमोदन के बाद भी भुगतान किया जाना था। इसके बाद भी समानांतर आईडी बनाकर फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।
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