बलिया। कोरोना संक्रमण और पंचायत चुनाव के बीच गेहूं खरीद बंद हो चुकी है। जिले में अधिकतर केंद्र या तो बंद हैं या वहां खरीद नहीं हो रही। इसके चलते किसान जहां क्रय केंद्रों का चक्कर काटने को मजबूर हैं या फिर औने-पौने दामों पर बिचौलियों को गेहूं बेचने को विवश हैं।
किसानों को अनाज का माकूल मूल्य दिलाने को लेकर शासन के निर्देश पर जिले में कुल 71 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें मार्केटिंग विभाग के 25, पीसीएफ के 40, मंडी समिति के 4 और एफसीआई के दो क्रय केंद्र निर्धारित किए गए हैं। जिला विपणन अधिकारी की माने तो एक अप्रैल से निर्धारित किए गए सभी क्रय केंद्रों का संचालन शुरू है लेकिन हकीकत में अधिकतर इलाकों में क्रय केंद्र या तो खुले ही नहीं है या फिर खरीद नहीं हो रही है। इसके चलते, किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को पंजीकरण के बाद सत्यापन के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों की परिक्रमा करनी पड़ रही है। गड़वार ब्लॉक के शाहपुर में साधन सहकारी समिति पर गेहूं क्रय केंद्र बनाया गया है लेकिन यहां अब तक खरीद शुरू नहीं हुई है। इसे लेकर गांव और आसपास के किसान परेशान हैं। उनके खूनपसीने की कमाई खुले में पड़ी है। बुधवार की रात हुई बरसात में उनका तनाव और बढ़ा दिया है। गांव के अजय कुमार सिंह, सत्येंद्र सिंह, ललित मोहन आदि किसान गुरुवार को विपणन विभाग के अधिकारियों से मिलने के लिए जिला मुख्यालय पहुंचे लेकिन वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिला। परेशान किसान कलेक्ट्रेट भी पहुंचे लेकिन वहां भी जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी। हालांकि साधन सहकारी समिति के सचिव वीरेंद्र कुमार ने बताया कि कुछ तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से खरीद शुरू नहीं हो पा रही थी, उसे दूर कर लिया गया है। जल्द ही गेहूं की खरीद शुरू हो जाएगी। यही हाल, चिलकहर ब्लॉक के सिकरिया खुर्द का भी है। यहां गेहूं क्रय केंद्र का संचालन शुरू नहीं हुआ है। यहां के ग्रामीणों ने पिछले दिनों जिलाधिकारी से मिलकर उन्हें ज्ञापन भी दिया था लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों है।
क्रय केंद्रों पर खरीद न होने से बिचौलिए को गेहूं बेचने को मजबूर
चितबड़ागांव। नगर पंचायत चितबड़ागांव अंतर्गत किसानों को गेहूं का उचित मूल्य दिलाने वाले सभी तीनों केंद्र गुरुवार को भी बंद मिले। या तो किसी केंद्र का प्रभारी या किसी केंद्र का अधिकारी कोरोना की चपेट में है। दर-दर भटक रहे क्षेत्र के अन्नदाता अपना गेहूं बिचौलियों को औने-पौने भावों में बेचने को मजबूर हैं।
थाना क्षेत्र में मार्केटिंग विभाग का क्रय केंद्र चितबड़ागांव मंडी परिसर में और एक भारतीय खाद्य निगम का उसरौली और एक मंडी समिति का मंडी परिसर में खुला हुआ है। इन तीनों क्रय केंद्रों पर गुरुवार को भी खरीद न होने से अपनी खरीद तिथि पर आए किसानों को लौटना पड़ा। बताया जाता है कि चितबड़ागांव विपणन केंद्र प्रभारी मंडी परिसर में खुले क्रय केंद्र पर हफ्तों से नहीं आ रहे हैं। ठीक इसी तरह, मंडी समिति के केंद्र प्रभारी कमलेश रावत कोरोना पॉजिटिव हैं। लिहाजा यह केंद्र भी बंद पड़ा है। एफसीआई का क्रय केंद्र जो उसरौली में खुला है। वहां बताया जाता है कि खाली बोरी के अभाव में खरीदारी नहीं हो रही हैं।
क्रय केंद्रों से लौट रहे किसान
नरहीं। विकास खंड सोहांव अंतर्गत स्थापित दो क्रय केंद्र बंद पड़े हैं। किसी केंद्र का प्रभारी तो किसी केंद्र का अधिकारी कोरोना की चपेट में तो कोई पंचायत चुनाव में व्यस्त है। एक अप्रैल से गेहूं की खरीद होनी थी लेकिन अन्नदाता अपना गेहूं बिचौलियों को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं। क्षेत्र के चौरा कथरिया में मार्केटिंग विभाग का और एक क्रय केंद्र सुरही साधन सहकारी समिति पर खुला है। इन क्रय केंद्रों पर खरीद न होने से अपने खरीद तिथि पर आए किसानों को वापस लौटना पड़ा। बताया जाता है कि चौरा कथरिया के गेहूं क्रय केंद्र प्रभारी आकाश को पिछले तीन दिनों से कोरोना हुआ है, जिससे केंद्र बंद है। यही हाल साधन सहकारी समिति सुरही स्थित क्रय केंद्र का भी है, जहां अभी खरीद न होने से किसान परेशान हैं।