नगर में कूड़ा फेंकना और उसके निस्तारण की व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है। करीब एक लाख की आबादी के लिए नगर पालिका ने कई जगहों पर कूड़े के कुछ डिब्बे रखवाए जरूर हैं, लेकिन यह नगर की जरूरत के लिहाज से काफी कम हैं। यही नहीं पालिका के अधिकारी भी कूडे़ के निस्तारण के प्रति संवेदनशील नहीं दिखते हैं। हालत यह है कि नगर से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण के लिए कोई माकूल जगह तक तय नहीं है। पूरा कूड़ा गंगा नदी के कछार में गिरा दिया जाता है। कूड़ा निस्तारण का ये तरीका महावीर घाट के लोगों के लिए खासा परेशानी वाला है।
मोहल्लों तथा सरकारी कॉलोनियों में नगर पालिका ने मात्र 40 कूडे़दान रखवाए हैं जो क्षेत्र के लिहाज से बेहद कम हैं। यहां एकत्र कूड़ा ट्रैक्टर ट्राली या अन्य छोटी गाड़ियों से उठाकर महावीर घाट के पास गंगा के कछार में डाल दिया जाता है। कूड़ा अधिक हो जाने पर उसमें आग लगा दी जाती है।
जिससे उठने वाला धुएं से आसपास के रिहायशी इलाके के लोग बेहाल रहते हैं। बारिश के दिनों में या गंगा के जलस्तर की बढ़ोतरी के दौरान पूरा कूड़ा गंगा में समाहित हो जाता है। कूड़ा निस्तारण के इस तरीके के विरोध में लोगों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई। लेकिन नपा द्वारा कूड़ा फेंकने के स्थान में परिर्वतन नहीं किया जाता है।