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पंचतत्व में विलीन, अब लोगों के चित्त में रह गए चितरंजन

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बलिया। मानवाधिकारवादी चिंतक चितरंजन सिंह शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके गांव स्थित सरयू नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट पर उनकी अंत्येष्टि की गई। मुखाग्नि भतीजे प्रशांत रंजन ने दी। इससे पहले चितरंजन सिंह की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसमें सदर सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही चल रहे थे तो ठीक उनके बगल में वे लोग भी चल रहे थे, जिनके लिए मानवाधिकारवादी ने कभी न कभी कोई लड़ाई लड़ी थी।
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चितरंजन सिंह के निधन की खबर मिलते ही शनिवार की सुबह से लोग उनके सुल्तानपुर स्थित आवास के सामने जुटने लगे थे। लंबे समय से बीमार चल रहे चितरंजन सिंह ने शुक्रवार की शाम अंतिम सांस ली थी। 18 जून को तबीयत अधिक खराब होने पर उन्हें शहर के एक निजी नर्सिगिं होम में भर्ती कराया गया था। वहां से 21 जून को वाराणसी के लिए रेफर किया गया। 22 जून को बीएचयू के चिकित्सक ने भी उन्हें घर ले जाने की सलाह दी थी। इसके बाद सुल्तानपुर स्थित आवास पर ही उन्हें जीवनरक्षक दवाओं के सहारे रखा गया था। शुक्रवार की शाम जब परिजनों को लगा कि उनके शरीर में कोई हरकत नहीं है तो डॉक्टर को बुलाया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर के चिकित्सक डॉ. संजय तिवारी ने जांच के बाद चितरंजन सिंह को मृत घोषित कर दिया। शनिवार को उनकी अंतिम यात्रा में बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, पूर्व मंत्री राजधारी, जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही, वरिष्ठ पत्रकार मोहन सिंह, उपजिलाधिकारी बांसडीह दुष्यंत कुमार मौर्य, तहसीलदार गुलाबचन्द्रा, प्रभारी निरीक्षक बांसडीह राजेश कुमार सिंह, केतकी सिंह, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह, भाकपा माले के श्रीराम चौधरी, शुशील पांडेय, डॉ. हरिमोहन सिंह, अखिलेश सिन्हा, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह, गोपाल, लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष निर्भय ीनारायन सिंह, लेखपाल संघ बांसडीह तहसील अध्यक्ष निर्भय कुमार सिंह, विजय चौधरी, भाजपा नेता अनूप सिंह, योगेंद्र सिंह आदि शामिल रहे। जिलाधिकारी ने पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
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जिले में पीयूसीएल की रखी थी बुनियाद
बलिया। लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएइल) की जिला इकाई की शोकसभा में संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संगठन के सदस्यों ने कहा कि चितरंजन सिंह के निधन से अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने ही यहां पीयूसीएल की बुनियाद रखी थी। उनके नेतृत्व व निर्देशन में संगठन ने जिले में कई निर्णायक लड़ाई लड़ी। वे हमारे मार्गदर्शक होने के साथ ही देश में लड़े जानेवाले जनांदोलनों के योद्धा थे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण में उनकी अगाध श्रद्धा थी। वे कहते थे कि हम जेपी की संवेदनाओं व संवेगों से संचालित होते हैं। सदस्यों ने कहा कि चितरंजन सिंह जिले में मानवाधिकार के लिए हुए संघर्षों के लिए लंबे समय तक याद किए जाएंगे। कोकाकोला के खिलाफ हुई लड़ाई, भूख से हुई मौत को लेकर चला संघर्ष, काला कानून के विरुद्ध जागरूकता अभियान, पुलिस द्वारा किए गए फर्जी मुठभेड़ को लेकर लड़ी गयी लड़ाई में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। शोकसभा में रणजीत सिंह, डॉ. हरिमोहन, प्रदीप सिंह, गोपाल सिंह, जेपी सिंह, अरुण सिंह, सूर्य प्रकाश सिंह, विवेक सिंह, उदयनारायण सिंह, लक्ष्मण सिंह, विनय तिवारी, विनय सिंह, रामकृष्ण यादव, अजय पांडेय, रामजी तिवारी, रणवीर सिंह सेंगर, बलवंत यादव, अमर नाथ यादव, संजय सिंह, ज्योति स्वरूप पांडेय, भुल्लू सिंह उपस्थित थे।
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