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काश! आज चंद्रशेखर होते, बलिया वालों को याद आ रहे युवा तुर्क

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बलिया। जिले में जब भी कभी संकट की स्थिति पैदा होती थी तो युवा तुर्क पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ढाल के रूप में खड़े रहते हैं। आज जब कोरोना की आपदा से लोग परेशान हैं, ऐसे में युवा तुर्क याद किए जा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती 17 अप्रैल लॉकडाउन के चलते सभी कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए हैं।
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आज जिला महिला अस्पताल कैंपस में बना एक सौ बेड के अस्पताल की बिल्डिंग धूल फांक रही है। कोरोना के लिए प्राइवेट अस्पतालों को एल-1 अस्पताल के रूप में तैयार करना पड़ रहा है। ऐसे में लोग पूर्व प्रधानमंत्री को याद कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि 1998 में घाघरा की बाढ़ ने तबाही मचाई थी। लोग परेशान थे। देहात के इलाकों में पशुओं का चारा गायब हो गया था। प्रशासन भी कुछ करने में असमर्थ था। तब चंद्रशेखर ने एक मालगाड़ी भूसा जिले में भेजवाया था। वह भूसा जिले के पशुपालकों के संजीवनी साबित हुई थी। इसी तरह जिला अस्पताल कि वर्तमान बिल्डिंग बनने के बाद वर्षों तक धूल फांकती रही। अचानक एक दिन पता चला कि चंद्रशेखर ने नई बिल्डिंग शुरू कराने के लिए ट्रकों में भरकर मरीजों के लिए बेड, टेबल, डाक्टरों के लिए कुर्सियां आदि भेजी हैं। यहां उन सामानों को रिसीव करने के लिए कोई तैयार नहीं है तब बलिया के सीएमओ रहे ओपी सिंह के सामने यह संकट था कि सामान सरकारी नहीं है तो वे कैसे रिसीव करें। वरिष्ठ मानवाधिकारवादी नेता व पीयूसीएल के प्रदेश उपाध्यक्ष चितरंजन सिंह बताते हैं कि तब सामान लेकर आए वाहन चालकों ने अपने मालिकों को इस स्थिति की जानकारी दी। वाहन स्वामियों ने चंद्रशेखर को समस्या बताई तो उन्होंने चितरंजन सिंह समेत अन्य कई लोगों को सामान रिसीव करवाने की जिम्मेदारी दी। तब चंद्रशेखर के बलिया के अनुयायियों और स्थानीय मीडिया के दबाव प्रशासन ने सामान रिसीव किया और जिला अस्पताल की बिल्डिंग में मरीजों का उपचार शुरू हुआ था। आज फिर जिला संकट में है और लोगों को चंद्रशेखर की बहुत याद आ रही है।
कोरोना कर्मयोगियों को मिलेगा गमछा
बलिया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती पर 17 अप्रैल पर उनके राजनीतिक सलाहकार रहे एचएन शर्मा ने कोरोना से जंग में जुटे स्वास्थ्य और सफाई कर्मियों में शुक्रवार को गमछा वितरित करने का फैसला किया है। इसके लिए युवा भारती ट्रस्ट, नई दिल्ली के सचिव एचएन शर्मा ने बुधवार को अजय कुमार उपाध्याय के माध्यम से जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही को एक हजार गमछा उपलब्ध कराया।
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चंद्रशेखर के जीवन में सर्वोपरि रहा राष्टहित: अनिल सिंह
बलिया। चंद्रशेखर की जयंती की पूर्व संध्या पर शेखर फाउंडेशन के अध्यक्ष व पूर्व ब्लाक प्रमुख अनिल सिंह ने कहा कि आज विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। देश में लॉकडाउन है। इस वजह से 17 अप्रैल को चंद्रशेखर जयंती पर चंद्रशेखर उद्यान में जयंती होने वाले कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए हैं। चन्द्रशेखर के जीवन मे राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा। देशवासियों से आग्रह है कि अपने घरों में रहकर ही चंद्रशेखर श्रद्धा सुमन अर्पित करें। चंद्रशेखर की विचारधारा हिंदुस्तान के सामान्य जन की जिंदगी में खुशियां बिखरने की प्रतिबद्ध विचारधारा थी।
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