इंदरपुर। जनपद के सबसे बड़े ब्लॉक नगरा में सरकारी विभागों की व्यवस्था बेपटरी नजर आ रही है। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से लेकर बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) तक के पदों पर स्थायी तैनाती नहीं है। ज्यादातर विभागों का कामकाज दूसरे ब्लॉकों में तैनात अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर चलाया जा रहा है। नतीजा यह है कि अधिकारियों की उपलब्धता निर्धारित नहीं होने से फरियादियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थायी अधिकारियों की तैनाती के अभाव में सरकारी कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। मंगलवार को विभिन्न सरकारी कार्यालयों की पड़ताल में कहीं अधिकारी की कुर्सी खाली मिली तो कहीं कार्यालय पर ताला लटका मिला। इससे सरकारी व्यवस्था की हकीकत सामने आई।
बीडीओ की कुर्सी खाली मिली
सुबह 10:25 बजे खंड विकास कार्यालय नगरा में बीडीओ की कुर्सी खाली मिली। यहां रसड़ा के बीडीओ को नगरा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। बताया गया कि वह सप्ताह में तीन दिन रसड़ा और तीन दिन नगरा में बैठते हैं। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में एडीओ कृषि मौजूद मिले।
सीडीपीओ की जिम्मेदारी भी अतिरिक्त प्रभार पर
सुबह 10:30 बजे बाल विकास परियोजना कार्यालय नगरा में सीडीपीओ की कुर्सी खाली थी। यहां भी रसड़ा की सीडीपीओ को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह सप्ताह में तीन दिन रसड़ा और तीन दिन नगरा की जिम्मेदारी संभालती हैं। कार्यालय में मौजूद सुपरवाइजर अर्चना गुप्ता ने बताया कि सीडीपीओ की ड्यूटी जिला मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम में लगी है। इस वजह से वह कार्यालय नहीं पहुंची थीं।
पशु चिकित्सालय में भी डॉक्टर नदारद
सुबह 10:35 बजे नगरा स्थित पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्साधिकारी की कुर्सी खाली मिली। कार्यालय में पशुधन प्रसार अधिकारी मौजूद थीं। यहां कसौंडर के पशु चिकित्साधिकारी को नगरा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। बताया गया कि वह सप्ताह में केवल बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को नगरा में बैठते हैं।
स्थायी तैनाती की उठी मांग
डॉ. शशिप्रकाश कुशवाहा, नगर पंचायत नगरा ने कहा कि जनपद का सबसे बड़ा ब्लॉक होने के कारण यहां के सरकारी कार्यालयों में स्थायी अधिकारियों की तैनाती जरूरी है। अतिरिक्त प्रभार वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के प्रति गंभीर नहीं रहते। वहीं, अब्दुलपुर मदारी निवासी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि नगरा के सरकारी कार्यालयों की स्थिति काफी दयनीय है। अधिकारी समय से नहीं बैठते, जिससे फरियादियों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
दो नए बीडीओ जल्द मिलने वाले हैं। एक सप्ताह के अंदर जिले में आ जाएंगे। इसके कारण थोड़ी दिक्कत है। ब्लाॅक की सारी योजनाओं का संचालन नियमित व सुचारू रूप से संचालित हो रही है। - आलोक कुमार, सीडीओ।