बिहार विधानसभा चुनाव-2015 में महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद बिहार से सटे गांवों में भी जश्न और गम का माहौल रहा। सीमा से सटे गांवों के लोगों की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही। कोई जातीय समीकरण को तो कोई बिहार में नीतीश के कराए के विकास कार्यों को सफलता का कारण बता रहा है। वहीं भाजपा के सहयोगी दलों का कमजोर पड़ना भी सफलता का कारण माना जा रहा है।
सोनबरसा निवासी मनोज कुमार ओझा ने कहा कि बिहार में नीतीश के विकास कार्य और जाति समीकरण के कारण भाजपा को मात खानी पड़ी। इस हार से भाजपा को सबक लेने की जरूरत है। पांडेयपुर निवासी मैनेजर सिंह ने कहा पीएम नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के अपने वादों को अभी पूरा नहीं कर सके हैं। जिससे दिल्ली और बिहार में उनको हार का सामना करना पड़ा है। टोला सिवन राय निवासी रामकुमार सिंह ने कहा मोदी ने लोस में किसानों के उत्पाद को लागत के दोगुने मूल्य पर खरीदने का वादा किया था। लेकिन सरकार बनने का डेढ़ साल बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ। जिसका खामियाजा बिहार में भाजपा को भुगतना पड़ा।
कोटवानारायणपुर निवासी नर्वदेश्वर राय बबुआ ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ऐसा नहीं है कि कोई विकास कार्य नहंी कर रही है। लेकिन उसके परिणाम अब तक पटल पर नहीं दिख रहा है। जबकि जनता की मानसिकता तत्काल लाभ की होती है।