प्रांतीय सीमा पर हो रही तस्करी पर अमर उजाला की खबर को संज्ञान में लेते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर निगरानी के लिए चेकपोस्ट पर सीसीटीवी कैमरा तो जरूर लगा लेकिन वह तस्करों पर नजर रखने में मुफीद साबित नहीं होगा। प्रशासन का दावा दूसरे दिन ही तार-तार हो गया।
दरअसल सीसीटीवी कैमरे इस तरह से लगाए गए हैं कि ताकि कैमरे की नजर में बिहार से होने वाले अवैध कारोबार तथा पिकेट पर होने वाले पुलिसिया ‘खेल’ रिकार्ड नहीं हो सके। कैमरे के एंगल को गाजीपुर व बलिया मार्ग पर कर दिया है। इसके चलते बिहार की ओर से होने वाले अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है।
नरहीं थाना क्षेत्र के प्रांतीय सीमा भरौली में स्थित गंगा पुल का रास्ता तस्करी के लिए कुख्यात है। पुलिस समेत विभिन्न विभागों की मिलीभगत से लाल बालू, कोयला, गिट्टी, रेडीमेड, दवाएं आदि जहां बिहार की ओर से लाए जाते हैं वहीं गल्ला, शराब, पशु आदि बिहार भेजा जाता है।
वर्ष 2014 में पुल को मरम्मत के लिए भारी वाहनों के आवागमन पर बिहार सरकार की ओर से प्रतिबंधित करने के बाद से यह सभी कारोबार छोटे वाहनों से होने लगे। खासकर अवैध तरीके से आने वाले लाल बालू से तो माफियाओं के साथ ही वन विभाग और पुलिस खूब ‘लाल’ होते रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने तस्करी तथा वन विभाग की ओर से किए गए करोड़ों के गोलमाल का खुलासा किया तो वन विभाग ने जहां मोबाइल टीम लगाकर अभिवहन शुल्क की वसूली शुुरु कराई ।
प्रशासन की ओर से चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर चौराहे पर होने वाली तस्करी की निगहबानी का दावा किया। ‘अमर उजाला’ ने जब इसकी पड़ताल की तो सच्चाई सामने आ गई। चौराहे पर स्थित पुलिस बूथ के ऊपरी दीवार पर दो कैमरे लगाए हैं।
हैरानी की बात है तस्करी बिहार की ओर से होती है और वन विभाग भी प्रांतीय सीमा पर अभिवहन शुल्क वसूली में ‘खेल’ करता है। इसके अलावा इसी सड़क पर पुलिस भी काफी ‘मुस्तैद’ रहती है। लेकिन कैमरे को ठीक इस मार्ग के विपरीत दिशा में लगवाए गए हैं ताकि अवैध कारोबार पर कैमरे की नजर नहीं पड़ सके।
जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र भरौली पिकेट पर तस्करी की मिल रही शिकायतों के मद्देनजर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरा लगवाया गया है। रही बात उसके एंगल को गड़बड़ रखने के मामले की तो उसकी अवश्य जांच कराई जाएगी। - सुजाता सिंह, एसपी, बलिया