भाकपा (माले) की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्रीराम चौधरी ने कहा कि पत्रकारों की गिरफ्तारी में जितना दोषी स्थानीय प्रशासन है उससे ज्यादा दोषी प्रदेश सरकार है। अगर ऐसा नहीं होता तो सरकार ने पत्रकारों को रिहा करके अधिकारियों को बरखास्त कर दिया होता।
मऊ के पत्रकार धमेंद्र भारद्वाज ने कहा कि सच को उजागर करने वालों को कुचला जा रहा है तो आमजन को क्या न्याय मिलेगा। जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि अयोध्या प्रसाद बिंद ने कहा कि प्रशासन ने अपनी करतूत छुपाने के लिए पत्रकारों को गिरफ्तार किया है। पत्रकार मनोज चतुर्वेदी ने निर्दोष पत्रकारों को रिहा करो गीत सुनाया। बैरिया के पत्रकार विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि निर्दोष पत्रकारों को बिना शर्त के रिहा किया जाना चाहिए। गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, कानपुर के तमाम पत्रकार आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे।
बैरिया से लवकुश सिंह, रवींद्र मिश्र, सुनील पांडेय, विश्वम्भर गुप्ता, अनिल सिंह, सुमित सिंह, सुरेश मिश्र, गांधी पांडेय, गाजीपुर से पधारे महेशानंद श्रीवास्तव, अजय सिंह, प्रशांत सिंह, विशाल गुप्ता, पिंटू सिंह, दिनकर उपाध्याय, कमलेश उपाध्याय, आजमगढ़ से पधारे विनोद कुमार सिंह, माता प्रसाद तिवारी, अवधेश यादव, विनोद यादव, मुन्ना सिंह, मऊ से पधारें विनय कुमार, श्रीमती पूनम सिंह, अरविंद्र मूर्ति, राजेश गुप्ता, बलवंत यादव, जाकिर हुसैन, अरविंद गोंडवाना, अजय भारती, करूणा सिंधु सिंह, रणजीत मिश्रा, मकसूदन सिंह, संजय तिवारी, अखिलेश यादव, मनोज चतुर्वेदी, मुकेश मिश्रा, राजू दुबे, सन्नी, सनंदन उपाध्याय, विक्की गुप्ता, जितेंद्र उपाध्याय, कैलासपति मिश्रा, प्रभात पांडेय, धनंजय तिवारी, कृष्णकांत पांडेय, हसन खां, कंचन सिंह, विवेक जायसवाल, राजकुमार यादव, रोशन जायसवाल, रत्नेश सिंह, अमित कुमार, सुनील दादा, आलोक कुमार, जयराम अनुरागी, सुरेमन, माले नेता लक्ष्मण यादव, उपेंद्र, संजय सिंह, श्याम प्रकाश शर्मा, दिनेश गुप्ता, आसिफ जैदी, मुशीर जैदी, समेत सैकड़ों पत्रकार, अधिवक्ता, व्यापारी, छात्रनेता आदि मौजूद रहे। संचालन श्रवण कुमार पांडेय ने किया।
वरिष्ठ पत्रकार मकसूदन सिंह ने अनशन स्थल पर खून से खत लिखा, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि सच को उजागर करने वाले तीनों पत्रकारों की बिना शर्त रिहाई होनी चाहिए। उनकी गिरफ्तारी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। हमारा आंदोलन पत्रकारों की रिहाई तक चलता रहेगा।