बता दें कि वर्ष 2007 में बसपा ने छह सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि उस समय जिले में विधानसभा की आठ सीटें थीं। इसके बाद वर्ष 2012 में परिसीमन बदलने से जिले में सात विधानसभा सीटें हो गईं। इस वर्ष में केवल उमाशंकर ही जीते और वर्ष 2017 में यही केवल जीत दर्ज कर सके और इस चुनाव में तो प्रदेश में इकलौता जीत हासिल की है।
1984 में बसपा का गठन हुआ था। तब से लेकर आजतक पार्टी ने कई बार उतार-चढ़ाव देखे लेकिन 2012, 2017 और अब 2022 में जिस तरह पार्टी का जनाधार घटता गया उससे पार्टी का सफर आसान नहीं है। 1993 में बसपा 12 वीं विधानसभा चुनाव में पूरी तरह फॉर्म में उतरी।
यूपी की 164 प्रत्याशियों में बसपा के 67 प्रत्याशी जीते। यह जीत बसपा के लिए बड़ी थी। इन आंकड़ों ने हर किसी को चौंका दिया था। मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने हाथ मिला लिया। मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। हालांकि दोनों दलों के बीच मनमुटाव शुरू हुआ और महज एक साल 181 दिन तक मुख्यमंत्री रहने के बाद मुलायम की सरकार गिर गई।
3 जून 1995 को मायावती यूपी की मुख्यमंत्री बनीं और वह महज 18 अक्टूबर 1995 तक 137 दिनों तक सीएम रहीं। राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। 1996 में बीएसपी ने 296 सीटों पर प्रत्याशी उतारे जिसमें से केवल 67 सीटों पर ही उम्मीदवार जीते। बसपा का वोट प्रतिशत 19.64 रहा। 2002 में यूपी की 401 विधानसभा सीटों पर बसपा लड़ी, इनमें से 98 विधायक जीते।
वोट प्रतिशत 23.06 रहा। 2007 में बंपर जीत के साथ बसपा के 403 में से 206 विधायक जीते और पार्टी को 30.43 फीसदी वोट मिले और मायावती मुख्यमंत्री बनीं। 2012 में बसपा को 403 सीटों में से महज 80 सीटों पर जीत मिली। 2017 में बसपा 403 सीटों वाली विधानसभा में 19 सीटों के साथ तीसरा स्थान मिला था। 2022 विधानसभा चुनाव में बसपा को प्रदेश में मात्र सीट हासिल हुई है जो जिले की रसड़ा विधानसभा सीट है जहां से उमाशंकर सिंह ने हैट्रिक लगाई है।