बलिया। महर्षि भृगु की तपोस्थली और उनके शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर लगने वाले ददरी मेले में बुधवार को दोपहर 12 बजे के बाद भीड़ उमड़ना शुरू हो गया। आलम यह रहा कि दो बजते-बजते पूरा मेला खचाखच भर गया। उधर, भारतेंदु मंच भी सजकर तैयार है। इस मंच का शुभारम्भ 18 नवंबर को दंगल प्रतियोगिता के साथ हुई। इस मंच पर अब 23 नवंबर को संत समागम होगा और 25 नवंबर को कौव्वाली आयोजित होगी। तत्पश्चात ददरी मेले में विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित होगी। वहीं 27 नवंबर को मुुुशायरा, 29 नवंबर को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, एक दिसंबर को ददरी महोत्सव तथा तीन दिसंबर को समापन होगा।
बुधवार को मेले में आए एक तरफ युवक-युवतियों संग नई नवेली दुल्हनें व नन्हें-मुन्ने बच्चों ने ज्वाइन ग्रिल, ब्रेक डांस, मारूति- बाइक सकर्स, ड्रैगन ट्रेन, रेंजर, टोरा-टोरा, नाव आदि पर चढ़कर आनंद लिया तो दूसरी तरफ महिला-पुरुषों ने चूड़ी, क्राकरी, सौंदर्य प्रसाधन, चप्पल-जूता, हर एक माल, होजरी, हैंडलूम, खादी, गर्म कपड़ा व अन्य सामानों की खरीददारी की। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी लखनऊ, कानपुर, फैजाबाद, कोलकाता, झारखंड, मेरठ, लुधियाना सहित अन्य स्थानों से आए दुकानदार खजला, चूड़ी, क्राकरी, सौंदर्य प्रसाधन, चप्पल-जूता, हर एक माल, होजरी, हैंडलूम, खादी आश्रम सहित अन्य वस्तुओं की दुकानें सजकर तैयार रही, जहां मेलार्थियों ने खरीदारी की। मेला घूमने के बाद मेलार्थियों ने चाट, बर्गर, फुचका, डोसा, जिलेबी, आइसक्रीम खाकर आनंद लिया। इसके बाद अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। सुरक्षा के मद्देनजर झूला से लेकर अन्य स्थानों पर पुलिस के जवान मुश्तैद रहे। इसके अलावा खुफिया विभाग की टीम भी सादे वेश में चक्रमण करती रही।