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Ballia News: त्याग, प्रेम और धर्मपालन का अद्वितीय आदर्श है भरत मिलाप

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बेरुआरबारी क्षेत्र के करिहरा गॉव में चल रहे रामकथा सुनने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद
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बेरुआरबारी। क्षेत्र के बाबा अमरनाथ करिहरा मंदिर प्रांगण में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा में कथावाचक राजन जी महाराज ने कहा कि त्याग, प्रेम और धर्मपालन का अद्वितीय आदर्श है भरत मिलाप।
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भगवान श्रीराम के वनगमन के बाद भरत-राम मिलन का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि केवट ने भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराकर भक्ति का उदाहरण दिया। इसके बाद चित्रकूट में श्रीराम और भरत का मिलन हुआ। यह मिलन भारतीय संस्कृति में त्याग, प्रेम और धर्मपालन का अद्वितीय आदर्श है।
भरत को अयोध्या लौटने पर पिता महाराज दशरथ के निधन और श्रीराम के वनवास का समाचार मिला। वे अत्यंत व्यथित हुए और स्वयं को दोषी मानते हुए राज्य स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। गुरुजनों, माताओं, मंत्रियों और अयोध्यावासियों के साथ वे चित्रकूट पहुंचे। वहां उन्होंने भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया। चित्रकूट में दोनों भाइयों का मिलन इतना भावुक था कि सबकी आंखें नम हो गईं।
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भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजसिंहासन संभालने की प्रार्थना की। लेकिन भगवान श्रीराम ने पिता के वचन और रघुकुल की परंपरा का पालन किया।
उन्होंने चौदह वर्ष का वनवास पूरा करने का संकल्प दोहराया। अंततः भरत भगवान श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटे। भरत ने केवल सेवक और प्रतिनिधि के रूप में राज्य का संचालन किया। महाराज ने भरत के त्याग, समर्पण और भाई के प्रति निष्कलंक प्रेम को प्रेरणा का स्रोत बताया। कथा के दौरान जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर कुंवर राकेश सिंह, डॉ अभिषेक सिंह और क्षेत्रीय विधायक केतकी सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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