स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. राम अनंत पांडेय।
बलिया। स्वतंत्रता संग्राम में बलिया के विद्रोही तेवरों की अपनी अलग पहचान रही है। इसी गौरवशाली परंपरा के प्रमुख सेनानी पं. राम अनंत पांडेय का जीवन त्याग, संघर्ष, निर्भीकता और जनसेवा की ऐसी मिसाल है, जिसे बलिया की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है। 1942 में उन्हें जिले का पहला डिप्टी कलेक्टर नामित किया गया।
पं. राम अनंत पांडेय का जन्म 23 सितंबर 1904 को दलन छपरा गांव में हुआ था। प्रारंभ में वे मुख्तारी के पेशे से जुड़े थे, लेकिन देश की गुलामी ने उन्हें विचलित कर दिया। वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह से प्रभावित होकर उन्होंने अपना पेशा छोड़ दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। बलिया में नमक सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा नमक की नीलामी की जा रही थी। अंग्रेजों के डर से जब कोई आगे नहीं आया तो में पं. राम अनंत पांडेय ने निर्भीकता दिखाते हुए 20 रुपये में नमक खरीद लिया। इस साहसिक कदम के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और करीब एक वर्ष जेल में रहना पड़ा।
भूमिगत रहकर चलाया आंदोलन
वर्ष 1935 के बाद उन्होंने भूमिगत रहकर स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी। बिहार के आरा जिले के मथमलपुर मठिया को उन्होंने गुप्त केंद्र बनाया। ‘विप्लव’ पत्रिका के माध्यम से अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनचेतना पैदा की। बाद में गिरफ्तार कर उन्हें आगरा सेंट्रल जेल भेज दिया गया, जहां प्रसिद्ध साहित्यकार मैथिलीशरण गुप्त भी बंदी थे। महात्मा गांधी के व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान वर्ष 1940 में पं. राम अनंत पांडेय को बलिया से व्यक्तिगत सत्याग्रही चुना गया। आंदोलन के दूसरे चरण में अप्रैल 1941 में उन्हें नजरबंद किया गया और दिसंबर 1941 में रिहा किया गया।
‘आजाद बलिया’ के पहले डिप्टी कलेक्टर
भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी भूमिका और अधिक प्रभावी हुई। अगस्त 1942 में उन्हें जिले का प्रथम डिक्टेटर नामित किया गया। 11 अगस्त 1942 को बलिया के चौक स्थित शहीद पार्क में आयोजित विशाल जनसभा में उन्होंने 20 हजार से अधिक लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अहिंसात्मक तरीके से अंग्रेजी प्रशासन को निष्प्रभावी बनाने का आह्वान किया। इसके बाद 19 अगस्त 1942 को बलिया ने अंग्रेजी शासन से मुक्ति की घोषणा कर इतिहास रचा। यही दौर ‘आजाद बलिया’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। पं. राम अनंत पांडेय को आजाद बलिया का पहला डिप्टी कलेक्टर बनाया गया।
दो बार रहे विधायक
पं. राम अनंत पांडेय लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी सक्रिय रहे। वे 1952-1957 और 1962-1967 तक बलिया सदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे। विधायक के रूप में उन्होंने जनहित और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के सम्मान में 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया।