बलिया। करीब डेढ़ दशक पहले जिले में हुए करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आने लगा है। मंगलवार को प्रकरण की जांच कर रही ईओडब्लू वाराणसी की टीम ने जिले के हनुमानगंज ब्लॉक के तत्कालीन बीडीओ रहे रामफेर राम को अमेठी से गिरफ्तार कर लिया। टीम के अनुसार वह मूलरुप से जौनपुर के निवासी थे और पिछले पांच सालों से अमेठी में छिप कर रहे थे। इसके पूर्व कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दिसंबर 19 में इसी ब्लॉक के तत्कालीन प्रभारी बीडीओ रहे एके पांडेय को टीम ने जनपद स्थित उनके गांव से गिरफ्तार किया था। जबकि सितंबर 19 में जिले के सीयर तहसील के तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक लक्ष्मण राम को वाराणसी से गिरफ्तार किया था। ईओडब्लू के इंसपेक्टर एके सिंह ने बताया कि तीन सदस्यीय टीम ने कार्रवाई कर अमेठी से आरोपी की गिरफ्तारी की है। बताया कि अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की जाएगी। इसको लेकर खाद्यान्न घोटाले से जुड़े लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
जिले में वर्ष 2002-03 से वर्ष 2005-06 के बीच संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले का मामला सामने आया। वर्ष 2005 में सबसे पहले सीबीसीआईडी ने 17 ब्लॉकों में हुई गड़बड़ी को देखते हुए अलग-अलग थानों में कुल 51 मुकदमे दर्ज कर जांच शुरु कर दी। इन मुकदमों में 2002-03 से वर्ष 2005-06 के बीच रहे सभी सीडीओ, पीडी, डीडीओ, बीडीओ, तहसीलदार, पूर्ति निरीक्षक, ट्रांसपोर्टर, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव आदि समेत कुल 6055 अधिकारियों व कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया। जांच शुरु होते ही जिले में हड़कंप मच गया और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा। इसके बाद इस जांच को शासन ने ईओडब्लू को दे दी। इसी बीच जिले के कुछ लोगों ने इस घोटा ले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने आठ मुकदमों को अपने अधीन लेते हुए जांच शुुरु कर दी। उधर, ईओडब्लू वाराणसी की ओर से 43 मामलों की जांच की जा रही है। कई मामलों में ईओडब्लू की ओर से पहले भी ग्राम पंचायत सचिवों से योजना से संबंधित पत्रावलियों की मांग की लेकिन सचिवों की ओर से पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराने पर नौ माह पहले संबंधित कस्टोडियन 14 ब्लॉकों के 117 सचिवों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्र भेजा। इसके बाद डीएम के निर्देश पर विभिन्न् थानों में म
सीडीओ की पहल पर शासन ने जांच का दिया था आदेश
बलिया। वर्ष 2005 में तत्कालीन सीडीओ व सत्ता दल के जिलाध्यक्ष के बीच विवाद हो गया। इसके बाद सीडीओ ने शासन को पत्र भेजकर आशंका जताया कि एसजीआरवाई के तहत बड़े पैमाने पर घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है जिसकी उच्चस्तरीय जांच कराया जाना आवश्यक है। सीडीओ की रिपोर्ट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मामले की जांच सीबीआईडी को दिया। वर्ष 2005 में जिले में पहुंची सीबीसीआईडी की टीम ने प्रथम दृष्टया जांच के बाद सभी 17 ब्लॉकों में हुई गड़बड़ी को देखते हुए कुल 51 मुकदमे दर्ज कराते हुए 6055 अधिकारियों व कर्मचारियों को आरोपी बनाया। वर्ष 2005 में आरोपियों की शिकायत पर शासन ने मामले की जांच ईओडब्लू को दे दी। अभी जांच चल ही रही थी कि हाईकोर्ट ने आठ मामलों की जांच सीबीआई क