बलिया। अब यह गंगा नदी का प्रकोप है। कटहल नाले की गुंडई है। बरसात की बदमाशी है या नगर पालिका की लापरवाही, लेकिन हकीकत यही है कि बारिश बंद होने के 48 घंटे बाद भी शहरी तो शहरी जिले में कानून व्यवस्था की रक्षा में तैनात पूरा पुलिस विभाग भी जलभराव की दुश्वारियों से दो चार हो रहा है। पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर जाना हो तो घुटनेभर पानी में घुसना है और घर लौटना हो तो भी हाल वही है।
इनकी छोड़िए पुलिस अधीक्षक को भी आफिस में बैठना हो तो पानी में उतरना मजबूरी है।
पुलिस परेड ग्राउंड और जिला स्टेडियम तो इस समय तालाब में बदला हुआ है। शहर के लगभग आधा दर्जन से अधिक मोहल्लों का हाल ये है कि लोग या तो अपना घर छोड़कर गांव भाग गए हैं या दूसरी जगह पर किराए के मकानों में शरण लिए हुए हैं। शहर की विवेकानंद कालोनी में तो बांस बल्ली के सहारे रोड से दरवाजे तक लोगों ने घर में घुसने का जुगाड़ बना रखा है। उधर, जेल से कैदी तो दूसरे जिलों में भेज दिए गए हैं, बंदी रक्षक और अन्य अधिकारियों को अभी भी कई दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। लगातार पांच दिन के बाद रविवार को शहर में बारिश पूरी तरह से बंद हो गई। इसके बाद भी शहर का पुलिस परेड ग्राउंड, जिला स्टेडियम, पुलिस लाइन, पुलिस आवास, पुलिस बैरक, फायर स्टेशन, जिला जेल, पुलिस मुख्यालय (एसपी कार्यालय) समेत टैगोर नगर, श्रीराम विहार कॉलोनी, छाया कॉलोनी, विवेकानंद कॉलोनी, जेल के पीछे की कॉलोनियां इस समय तालाब बनी हुई हैं।
हाल ये है कि इन कॉलोनियों में जिनके घर के फर्श की ऊंचाई थोड़ी नीचे है उनके घरों में पानी घुस गया है। ये लोग या तो घर छोड़कर चले गए हैं या छतों पर शरण लिए हुए हैं। जिनके घर ऊंचाई पर हैं राहत उन्हें भी नहीं है। उन्हें घर में तो राहत है लेकिन यदि घर से निकलना है तो घुटनेभर से लेकर कमर तक पानी में घुसना मजबूरी है। नगर पालिका का हाल ये है कि उसे ये समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर ये पानी वह कहां निकालकर ले जाए। कारण कि अब तक शहर का पानी जिस कटहल नाले में गिराया जाता था, इस समय वह गंगा में बाढ़ के कारण लबालब भरा हुआ है। ऐसे में शहर का बरसाती पानी निकल नहीं पा रहा है। पालिका के सामने दिक्कत ये है कि यदि उसकी ओर से कटहल नाले के पास गहराई बढ़ाने के लिए खोदाई कराई जाती है और कहीं नाले का पानी शहर की ओर बैक फ्लो कर गया तो स्थिति और भयावह हो जाएगी। ऐसे में कॉलोनियों और पुलिस लाइन के साथ पुलिस ऑफिस का पानी निकालने के लिए जेनरेटर और पंप लगाए गए हैं। लेकिन ये पानी निकालकर पहले से तालाब बने स्टेडियम और पुलिस परेड ग्राउंड में ही भरा जा रहा है ताकि फौरी राहत मिल सके।
आज भाई साहब बहुत व्यस्त हूं, कल बात करते हैं: नपाध्यक्ष
शहर में पांच दिन बारिश की त्रासदी झेलने वाली जनता के बारिश बंद होने के 48 घंटे बाद भी नगर पालिका अध्यक्ष अजय कुमार इस मुद्दे को इतना बड़ा नहीं मानते कि वे दो चार सवालों का जवाब ही दे दें। इस समस्या को लेकर जब बुुधवार की शाम को फोन किया गया और उनसे जलभराव की समस्या को लेकर पूछा गया कि दो तीन सवालों के जवाब दे सकते हैं क्या तो उन्होंने बड़ी गर्मजोशी से कहा क्यों नहीं पूछिए। हालांकि फोन के दौरान शोर बहुत हो रहा था। इस बीच सवाल पूछने से पहले ही उन्होंने कहा कि भाई साहब आज क्या और कल क्या, कल बात कर लेते हैं, इसके बात फोन कट गया।
लगातार पानी निकालने के प्रयास में जुटे हैं: अधिशासी अधिकारी
जलभराव की समस्या को लेकर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार विश्वकर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जलभराव की समस्या का एक ही कारण है कटहल नाला का ओवर फ्लो हो जाना। उसके ओवर फ्लो होने से शहर का पानी बाहर निकल ही नहीं पा रहा है। वैक्लपिक व्यवस्था के तहत दो जेनरेटर और दस मोटर लगाकर पानी को ऐसे इलाकों जहां आबादी है से निकालकर पुलिस परेड ग्राउंड और स्टेडियम में पहुंचाया जा रहा है ताकि लोगों को फौरी राहत मिल सके। डीएम के साथ पूरे इलाके के भ्रमण के बाद सभी को बस यही विकल्प इस समय समझ में आया है। बाकी अब इस पानी से राहत तभी मिल सकती है जब कटहल नाला में पानी कम हो या तेज धूप से पानी सुखे।
इस समय यदि कहीं आग लगी तो कमर में पानी में दौड़कर गाड़ियों तक पहुंचे फायर विभाग के कर्मचारी।- फोटो : BALLIA
पुलिस लाइन में बने पुलिसकर्मियों के आवास हैं, जहां जाने के लिए बरसाती पानी की इस वैतरणी को हर हाल म- फोटो : BALLIA
जिला स्टेडिएम के आफिस में जाने के लिए भी खिलाड़ियों को पानी घुसना पड़ रहा है।- फोटो : BALLIA
ये पुलिस लाईन प्रतिसार निरीक्षक व प्रसाशनिक कार्यालय है जहां से सभी जरूरी दिशा निर्देश जारी किए ?- फोटो : BALLIA