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कल्पवास के बाद गंगा तट से रवाना हुए संत

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बलिया। कार्तिक मास में गंगा तट के किनारे बाबा राम बालक दास की कुटिया पर कुल 31 दिन चला साधु-संतों का कल्पवास खत्म होने के बाद बुधवार को उनके भक्तों ने फूलमालाओं एवं अंगवस्त्रम भेंटकर ससम्मान विदाई दी। श्रीश्री1008 बाबा राम बालक दास के साथ करीब सौ से अधिक साधु एवं संतों का जमावड़ा उनके कुटिया पर हुआ था।
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पूरे मास गंगा स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं का जमावड़ा बाबा की कुटिया पर रोजाना होता था। यहां सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया जाता था। रामबालक दास बाबा अपने हाथों से सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद परोसते थे और उनको आशीर्वाद देते थे। गंगा के किनारे सीताराम एवं ठाकुर जी का दरबार भी सजा था। हनुमान जी का ध्वजा भी फहराया गया था। इन तीनों स्थानों पर विधिवत पूजा-पाठ भी होता था। इसी के मद्देनजर हर वर्ष की भांति कार्तिक मास के पूरा होने पर बाबा की कुटिया पर आए साधु-संतों को बाबू दयाशंकर वर्मा सहित दर्जनों श्रद्धालुओं द्वारा फूल-माला एवं अंगवस्त्रम से सम्मानित कर विदाई दी। साधु-संतों में रघुवर दास, लक्ष्मण दास, राम दास, महेश दास, परमेश्वर दास, जितेन्द्र दास, मूगापति दास, विशुन दास, सुमंगल बाबा, सुबाष बाबा, छेड़ी महाराज, हरि दास, बेनी माधव दास, महेन्द्र प्रसाद, बैजनाथ दास, देवनाथ दास, हरेन्द्र दास, लल्लन दास, सियाराम दास, स्वामी शंकरानंद, अमरनाथ, शिववचन दास, मदन दास के अलावा विवेक कुमार, अमित कुमार वर्मा, रमाशंकर, हरिशंकर, अजय यादव, संटू सिंह आदि मौजूद रहे।
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