नि:शक्त जनोें का प्रमाणपत्र समय से न बनने पर फेफना विधायक उपेंद्र
तिवारी बुधवार को भड़क गए और सीएमओ दफ्तर के सामने ही धरने पर बैठ गए।
इसके
बाद विधायक ने कमिशभनर और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को दूरभाष से मामले से
अवगत कराया। अधिकारियों के आदेश पर सीएमओ, सिटी मजिस्ट्रेट और कोतवाल जिला
अस्पताल पहुंचे।
सीएमओ ने अस्पताल में दो काउंटर खुलवा कर जांच शिविर आरंभ
कराया। विधायक ने आरोप लगाया कि चार दिन पहले मैंने सीएमओ को फोन किया,
लेकिन फोन नहीं उठाया।
इसके बाद डीएम को पत्रक सौंप चार फरवरी को जिला
अस्पताल में नि:शक्तजनों का सर्टिफिकेट बनाने के लिए चार काउंटर खोलने की
मांग की थी
, लेकिन जिला अस्पताल में न सीएमओ मिले और न ही सर्टिफिकेट बनाने
की कोई व्यवस्था रही। यहां तक कि कोई बताने वाला जिम्मेदार व्यक्ति भी
नहीं मिला।
इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीएमओ कार्यालय में किस स्तर
से अधिकारी, कर्मचारी काम करते हैं।
उन्हाेंने कमिशभनर और प्रमुख सचिव
से दूरभाष से शिकायत की।
इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट और कोतवाल के साथ सीएमओ
कार्यालय पहुंचे। जहां विधायक ने सीएमओ को खरीखोटी सुनाई।
तिवारी ने कहा
कि जिला विकलांग कल्याण मंत्री के प्रतिनिधि शैलेश चौधरी ने पिछले माह
प्रेसवार्ता में कहा था कि एक ही छत के नीचे नि:शक्त जनों को सब कुछ
मिलेगा।
चाहे वह नि:शक्तों का सर्टिफिकेट हो, पेंशन या उपकरण। इसके लिए तहे
दिल से धन्यवाद दिया कि कम से कम जिले के नि:शक्तों की समस्या का निदान एक
ही छत के नीचे हो जाएगा
लेकिन जिला अस्पताल में समस्या के निदान के लिए न
व्यवस्था मिली और न कोई जिम्मेदार व्यक्ति मिला। इस मौके पर एसीएमओ डा.
पीके सिंह, डा. आरके तिवारी, डा. सुमिता सिन्हा, आनंद दूबे, भोला चौबे सहित
सैकड़ों नि:शक्त रहे।