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अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य आज देंगी व्रती महिलाएं

Thu, 26 Oct 2017 12:53 AM IST
ballia
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छठ पूजा
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बलिया। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य गुरुवार की शाम को व्रती महिलाएं देंगी। छठ पर्व को लेकर नगर से ग्राम्यांचल के लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखा गया। घर-घर में महिलाएं एवं पुरुष सामग्री एकत्रित करने में मशगूल दिखे। बुधवार को महिलाओं ने पूरे दिन व्रत रखकर रात को चंद्रमा कोअर्घ्य देने के उपरांत रोटी-खीर खायीं। गुरुवार को महिलाएं दिनभर व्रत रहकर शाम में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी।        
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छठ को लेकर पूजन समिति व आमलोगों ने गंगा, घाघर, मगई, टोंस, तालाब, सरोवर आदि घाटों पर साफ-सफाई की। छठ पूजा के मद्देनजर नगर व ग्रामीण क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में वस्त्र, फल-फूल, सूप, दउरी आदि खरीदने के लिए भीड़ उमड़ी रही।

जिसके चलते पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रही। इस दौरान लोगों को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों के आईं महिलाओं ने पूजन सामग्रियों के अलावा साड़ी व अन्य जरुरत के सामानों की खरीदारी की।
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नगर के प्रमुख बाजार में देरशाम तक दूकानों पर भीड़ उमड़ी रही। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी जगह-जगह मुश्तैद रही। नगर के स्टेशन रोड, चित्तू पांडेय चौराहा, चौक रोड पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रही। जाम को हटाने के लिए पुलिस दिनभर हांफती नजर आई।

हालांकि पुलिस ने चौक में जाम से निजात दिलाने के उद्देश्य से बड़े व छोटे वाहनों के साथ ही दो पहिया वाहनों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा चौक में प्रवेश करने वाले मार्ग पर पुलिस ने बैरिकेटिंग भी कर दी है, ताकि कोई भी वाहन लेकर चौक की ओर न जा सके।  

व्रतियों की डगर होगी मुश्किल       
प्रशासन की अधूरी तैयारियां त्योहार का रंग करेगी फीका       
बलिया। जिले में छठ पर्व को लेकर चहुंओर उत्साह नजर आ रहा है। लेकिन प्रशासन के उदासीनता के चलते छठ पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। कारण कि तालाबों व गंगा घाटों की मुकम्मल सफाई नहीं हो सकी है। प्रशासन द्वारा छठ घाट व और घाट तक जाने वाले रास्तों पर सफाई के नाम पर कागजी कोरम पूरा किया गया है। ऐसे में व्रती महिलाओं को छठ घाट तक बदबूदार रास्ते से होकर जाना पड़ेगा।      

 
नगर के रामलीला मैदान, टाउन हाल मैदान, लाटघाट, बिचला घाट, महावीर घाट, रामपुर महावल, बहादुरपुर, हाईडिल कालोनी, सेमरा घाट, गंगहरा घाट, थम्हनपुरा घाट, बघेजी घाट, बिचला पोखरा, पश्चिम पोखरा, नवका पोखरा के अलावा रसड़ा के श्रीनाथ बाबा पोखरा आदि स्थानों पर गड्ढा खोदकर तालाब बनाया गया था।

जहां समितियों द्वारा आने-जाने वाले मार्गों व घाट को विद्युत उपकरणों से सजाया जा रहा था। इसके अलावा ध्वनि यंत्र भी लगाए जा रहे थे। इन घाटों पर व्रती महिलाएं छठ पूजा करती हैं। उधर, रामगढ़, जयप्रकाशनगर, मझौवा, भुसौला आदि क्षेत्रों में गंगा नदी के कटान के कारण घाट काफी गहरे हो गए हैं।

प्रशासन द्वारा ऐसे गंगा घाटों पर छठ पूजा के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में व्रती महिलाएं गिरकर चोटिल भी हो सकती हैं।        
      
घाटों पर मुश्तैद रहेगी पुलिस       
बलिया। पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार ने सभी थानाध्यक्षों व सीओ को छठ पूजा को लेकर अपने-अपने क्षेत्र में चक्रमण करते रहने का निर्देश दिया है। वहीं नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चिह्नित छठ घाटों पर पुलिस बल भारी मात्रा में मुश्तैद रहेगी, ताकि छठ घाट पर कोई अराजकतत्व हरकत न कर सके।

इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं जाएगी। एसपी ने आमजन से सौहार्द पूर्वक त्योहार मनाने की अपील की है।        
   
फल-फूल के साथ सूपली, दउरी की हुई खरीदारी       
बलिया। सूर्योपासना व्रत डाला छठ को लेकर नगर के बाजारों में लोगों की भीड़ बुधवार को उमड़ पड़ी। नगर की ह्रदयस्थली चौक में जाने वाले सभी मार्गोँ पर छठ पूजा सामग्री की दूकानें सजी रहीं। जिससे बाजार में खरीदारी के लिए भीड़ लगी रही।

इस दौरान श्रद्धालुओं ने नारियल, सेव, अनानास, संतरा, केला, मूली, शकरकंद, शरीफा, अमरस आदि की खरीदारी की। इसके अलावा महिलाओं ने सूपली, दउरी सहित पूजन सामग्री की खरीदारी भी की। हालांकि गरीब व मध्यम वर्ग की चमहिलाएं जहां बांस की बनी सूपली व दउरी की खरीदारी की वहीं अमीर घराने की महिलाएं पीतल की सूपली की खरीदारी की।        
     
घाटों व रास्ते को संजाने की रही होड़       
बलिया। नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के छठ घाटों की साफ-सफाई के साथ ही उसे सजाने संवारने के लिए समितियों द्वारा होड़ लगी रही। विभिन्न समितियां छठ घाट आने-जाने वाले मार्गों पर प्रचुर मात्रा में प्रकाश व अन्य सजावट में जुटी थीं।

ग्रामीण इलाकों के गांवों में घाट की ओर जाने वाले मार्गोँ पर ग्रामीणों की ओर से प्रकाश का इंतजाम किया गया था।        
बांसडीह रोड संवाददाता के अनुसार छठ पूजा को लेकर बुधवार को क्षेत्र के बाबा बालखंडी नाथ मंदिर स्थित पोखरे पर प्रधान विनोद सिंह के देखरेख में घाटों की साफ-सफाई की गई।        

घाटों पर बनने लगे बेदी       
बलिया। छठ पूजा को लेकर व्रती महिलाएं व उनके परिजन बुधवार को घाटों पर बेदी बनाने में भी जुटे रहे। इन्हीं बेदियों पर व्रती महिलाएं गुरुवार को पूजन-अर्चन करेंगी और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी।      

बाजार में छठ की भीड़ लगा रहा जाम, हुई जमकर खरीददारी
बलिया। नगर के चौक बाजार में छठ पूजन के एक दिन पहले खूब गहमा-गहमी रही। नगर के बाजार में जहां फल की दूकानों पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। वहीं दूसरे तरफ रेडिमेड कपड़े एवं चूड़ी तथा श्रृंगारिक सामानों के दूकानों पर भी भीड़ देखने लायक रही।  

सूर्य षष्ठी की पूर्व संध्या पर स्वच्छता व दान उत्सव कार्यक्रम        
बलिया। सनबीम स्कूल अगरसण्डा,के तत्वावधान में बुधवार को स्वच्छता व दान उत्सव कार्यक्रम ग्राम मिड्ढा के दलित बस्ती में आयोजित किया गया। जिसमें दलित बस्ती के निर्धन लोगों व बच्चों में विद्यालय के छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों द्वारा दी गई दान सामग्री जैसे- अन्न, वस्त्र, फल आदि का वितरण किया गया।

खेल शिक्षक पंकज, कामना, पंकज राय एवं सौरव के साथ विद्यालय के बच्चों जिसमें प्रमुख रूप से कक्षा नवीं के तुषार राज, मेधा राय, आयुष सिंह, पवन यादव, आशुतोष, संध्या, सृष्टि, साक्षी सिंह, कृषु पटेल, अमनजीत, गौरव गुप्ता सहित सौ से अधिक बच्चों द्वारा दलित बस्ती की साफ-सफाई की गई एवं उपस्थित ग्राम वासियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें स्वच्छता से होने वाले लाभ के बारे में बताया।

इस पुण्य अवसर पर विद्यालय के निदेशक डा. कुंवर अरूण सिंह, प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा एवं विद्यालय के छात्र-छात्राओं की उपस्थिति व योगदान अत्यंत ही सराहनीय रहा।

 जयप्रकाश नगर। हिंदुओं का पर्व छठ  हिंदू तो करते ही है लेकिन जयप्रकाश नारायण के पैतृक गांव  सिताबदियारा में एक मुस्लिम परिवार भी है जो वर्षो से इस पर्व को करता चला आ रहा है ।उसी आस्था से सुर्य उपासना का छठ हिंदुओं के सांथ मिलकर करता है ।

इतना ही नहीं छठ घाटों पर व्रत किये हुए पुरुष व महिलाओं की सेवा करने से भी नही चुकता । छठ के प्रति उनकी गहरी आंस्था कोई आज से नहीं वर्ष 1980 से ही है । उनकी गहरी आस्था को देखकर ही गांव के सभी हिंदू परिवार इस पर्व में उनका भरपूर सहयोग करते हैं  बुधवार को जब उनसे यह जानने का प्रयास किया कि आखिर यह सुर्य उपासना का छठ करने की प्रेरणा उन्हें कहां से मिली ।

इस पर मजूर मिया ने बताया कि मेरा ननिहाल छपरा के शीतलपुर में है । बचपन में मेरे चेहरे पर एक लहसन का दाग था । तभी मेरे ननिहाल में ही इस दाग को छुड़ाने के लिए छठ व्रत की मन्नतें मांगी गई । कहा यह भी गया कि छठी मईया यह दाग ठीक कर दें तो मै आजीवन उनका व्रत रखूंगा ।

कुछ दिनों के बाद वह दाग गायब हो गया और मै सुर्य उपासना का यह छठ करने लगा । वर्ष 1980 से शुरू किया यह व्रत मै प्रति वर्ष करता हूं । हां कभी गांव नगर में कोई दुखद घटना हो जाता है तभी इस व्रत पर विराम लगता है, अन्यथा घोर संकट में भी मै इस व्रत को करने से पीछे नहीं हटता ।

मजूर मियां बताते हैं कि छठ में भीख मांगने का भी बड़ा महत्व है । वैसे लोग इस मामले में शर्माते हैं किंतु छठ में संपंन लोगों को भी इस परंपरा का निर्वाह करना चाहिए । बताया कि मै संपूर्ण सिताबदियारा में छइ पूजा के लिए भीख मांगता हूं । सांथ में सभी के सांथ मिल कर तैयारी करता हूं ।

छठ के हर नियमों का पालन करने के सांथ-सांथ, छठ के दिन सुबह चाय, दातून, से व्रत किये हुए पुरुष महिलाओं की सेवा करता हूं । इसके अलावां डंके की ध्वनि से छठ घाट की शोभा भी बढाता हूं । यह सब करने से मेरे मन को बेहद शांति मिलती है ।

सिताबदियारा के लाला टोला निवासी मजूर मियां पेशे से डुग्गी बजाने का काम करते हैं । किसी बड़े नेता का जेपी के गांव में आगमन हो तो मजूर की डुग्गी यानि डंका उनके आगवानी में पहले से खड़ा होता है ।

जब मजूर अपनी डुग्गी लेकर गांव में निकलते हैं तो हर कोई समझ जाता है कि कोई न कोई महत्वपूर्ण सूचना है । गरीबी की चादर में लिपटे मजूर को जेपी के गांव का निवासी होने का भी गर्व कम नहीं है । इनके सूचना देने का अंदाज भी बेहद निराला है ।          
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