तकरीबन 17 माह लंबे इंतजार के बाद भी मेघालय के उग्रवादियों के कब्जे से पतियों की रिहाई न होने से अब घरवाले हताश हैं। शुक्रवार को अपहृत व्यापारियों की पत्नियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। पूछा कि आखिर उनके घर में कब अच्छे दिन आएंगे।
प्रधानमंत्री के नाम से तख्तियां लिए पतियों को मुक्त कराने की मांग की। बता दे कि रसड़ा इलाके के चार और एक बिहार के बक्सर के व्यापारी का मेघालय में उग्रवादियों ने अपहरण कर लिया था। तब से घरवाले गृहमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत कई जगह चक्कर काट चुके हैं लेकिन अब तक निराशा ही हाथ लगी है।
समग्र विकास इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजभूषण दूबे के नेतृत्व में धरनारत महिलाओं ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से पतियों की रिहाई की पुन: मांग की। महिलाओं ने कहा कि बलिया, वाराणसी से लेकर दिल्ली तक पति की रिहाई के लिए धरना-प्रदर्शन किया गया लेकिन अब तक केंद्र सरकार पतियों को रिहा नहीं करा सकी है।
प्रधानमंत्री से अपने और अपने परिवार का पेट पालने के लिए क्या करना चाहिए, यह सवाल पूछा? कहा हमारे अच्छे दिन कब आएंगे? 17 माह पहले बलिया के चार और बक्सर के एक व्यापारी को मेघालय प्रांत में उग्रवादियों ने अपहरण कर लिया था। इसमें रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के बैदलपुर निवासी मानिकचंद्र गुप्त, अशोक कुमार गुप्त, मिठ्ठू गोंड और संजय गोंड के साथ ही बिहार के बक्सर जिले के डुमराव निवासी सुनील गुप्त हैं।
इनका 25 मार्च, 2014 को अपहरण कर लिया गया था। बताया कि अपहरणकर्ता गारो नेशनल लिब्रेशन आर्मी के सदस्य है। उन्होंने 50 लाख की फिरौती मांगी थी। दस लाख रुपये फिरौती दिया गया, लेकिन पतियों को रिहा नहीं किया। इस मौके पर मीरा, बेबी, सरस्वती, महेंद्र गुप्त, विकास राय, अनूप मिश्र, आशीष राय, अजय यादव, मनीष गुप्त आदि मौजूद रहे।