रामगढ़। गंगा नदी के उस पार चल रहे ड्रेजिंग के कार्य को शुक्रवार को शाहपुर के काश्तकारों ने रोक दिया। काश्तकारों द्वारा कार्य रोकने की सूचना पर पहुंचे बैराज खंड के अधिकारियों ने काश्तकार को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि बिना हमारे खेत का मुआवजा दिए सरकार हमारी जमीन को हड़पना चाहती है। यह न्याय संगत नहीं है। पहले हमारी मांगों को पूरा किया जाए, तब हम अपने खेतों से होकर नदी की धारा को मोड़ने देंगे। अन्यथा की स्थिति में हम किसी भी हद की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
बताते चलें कि गंगा नदी के उस पार करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से नदी की धारा को मोड़ने का काम बैराज खंड वाराणसी की टीम द्वारा किया जा रहा है। इसमें 17 पोकलेन मशीन नदी की धारा को मोड़ने में लगी हुई हैं। इसके साथ ही गंगा नदी में एक ड्रेजर मशीन भी उतारी गई है कि समय रहते नदी की धारा को मोड़ा जा सके, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के साथ ही अन्य गांव को गंगा की गोद में जाने से बचाया जा सके। किसानों का कहना है कि नदी की धारा मोड़ने की करवाई को हमें बाध्य होकर रोकना पड़ रहा है। अब हम तभी कार्य शुरू होने देंगे जब जिला प्रशासन हमारी जमीन को चिन्हित कर मुआवजा देने का लिखित रूप से आश्वासन दे। किसानों का आरोप है कि यही जमीन हमारी जीविका का एकमात्र साधन है, जिसे सरकार छीन कर हमें भूमिहीन बनाना चाहती है, जबकि कोर्ट का निर्देश है कि जहां पर भी किसानों की जमीन पड़ रही है उसे अधिग्रहण कर आगे की कार्रवाई की जाए। काश्तकार जीतू सिंह, दीनानाथ सिंह, अनिल सिंह, वीरेंद्र मिश्रा, त्रिलोकी चौबे, उदय सिंह आदि काश्तकारों ने जिलाधिकारी से पहले जमीन की पैमाइश कराकर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि किसानों के साथ कोई अन्याय न हो सके।
काश्तकारों द्वारा शाहपुर मौजे में मुआवजे की मांग को लेकर पोकलेन को काम करने से रोका गया है। हम लोग काश्तकारों से वार्ता करने के लिए गए थे, लेकिन काश्तकार अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। हमने उनकी मांगों को जिलाधिकारी के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है, क्योंकि मुआवजा देने का काम जिलाधिकारी का है। अब वहां से जैसा निर्णय होगा वैसा किया जाएगा।
दिनेश चंद्र भारती, अवर अभियंता, बैराज खंड, वाराणसी