नगर के विचला पोखरा स्थित रामलीला मैदान में चल रहे लीला मंचन में विभीषण शरणागत, सेतु बंधन और अंगद-रावण संवाद की भावपूर्ण प्रस्तुति की गई। इस दौरान लोगों ने देर रात तक जमकर लीला का आनंद उठाया।
रावण के दरबार में उसके भाई विभीषण ने रावण को समझाया कि सीता को आदर सहित राम के पास पहुंचाने के बाद क्षमा मांग लो। इस पर रावण बरस गया और विभीषण को देशद्रोही करार देकर लंका से निष्कासित कर दिया।
रामदल में पहुंच विभीषण ने अपने आप बीती सुनाई। राम ने समुद्र जल से अभिषेक कर विभीषण को लंका राजा घोषित कर दिया। उधर नल-नील की सहायता से समुद्र पर सेतु का निर्माण किया। सेतु से होकर राम की सेना लंका पहुंची। राम ने अंतिम बार रावण को समझाने के लिए अंगद को भेजा। अंगद ने रावण को समझाया कि यदि राम से समझौता नहीं करोगे तो लंका का विनाश तय है। यह सुनते ही रावण आग बबूला हो गया।
तो अंगद ने अपना एक पैर पृथ्वी पर जमाकर रावण के योद्धाओं को पैर उठाने का चुनौती दे डाली। अंगद का पैर उठाने लंका के योद्धाओं ने भरपूर कोशिश की। लेकिन वे हिला तक नहीं सके। अंतत: रावण ने अंगद का पैर उठाना चाहा उसके पूर्व अंगद ने पैर हटाकर रावण को सलाह दी। यदि राम का चरण स्पर्श कर लो तो तुम्हारा उद्धार हो जाएगा। यह सुनकर रावण तमतमा गया और अंगद को मारने की कोशिश की। इसके पूर्व अंगद भाग निकले।