रसड़ा कस्बा स्थित श्रीनाथ बाबा सरोवर।
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जल संरक्षण के लिए अमृत सरोवरों की महत्ता को देखते हुए केंद्र सरकार ने अमृत योजना के तहत नगरीय क्षेत्रों में भी अमृत सरोवरों को विकसित करने का निर्णय लिया है। इन सरोवरों का विकास केंद्र और प्रदेश सरकार के साथ ही निकायों की सहभागिता से किया जाएगा। योजना के तहत जिले की रसड़ा नगर पालिका से नाथ बाबा सरोवर और नगरा नगर पंचायत से पचफेड़वा तालाब का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर केंद्र, राज्य सरकार और निकाय की राशि से यहां कार्य कराए जाएंगे।
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत सरकार ने तालाबों के सुधार के लिए अमृत सरोवर योजना चालू की है। इसके तहत प्रत्येक नगर निकायों में न्यूनतम एक या दो अमृत सरोवरों का विकास किया जाएगा। अमृत सरोवरों का क्षेत्रफल एक एकड़ या उससे अधिक होगा। सरोवरों के तटबंध पर वाकिंग पाथ बनाने के साथ ही बेंच की स्थापना की जाएगी, जिसका नगरवासी इसका प्रयोग सुबह शाम टहलने के लिए कर सके। सरोवर के चारों तरफ पौधरोपण किए जाएंगे। शासन की ओर से पिछले दिनों सभी निकायों से योजना के तहत मानक पूरा करने वाले उपलब्ध सरोवरों का डाटा अमृत योजना के पोर्टल पर फीड करने के निर्देश दिया गया था। इसमें रसड़ा नगर पालिका की ओर से प्रसिद्ध नाथ बाबा सरोवर और नगरा नगर पंचायत की ओर से पचफेड़वा तालाब का प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से स्वीकृति के बाद इस पर कार्य कराया जाएगा।
रसड़ा नगर पालिका के ईओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि 50 हजार से कम जनसंख्या वाले नगर निकाय को एक और इससे अधिक जनसंख्या वाले नगर निकाय को दो सरोवरों का प्रस्ताव भेजना था। तालाबों के सुधार के लिए करीब 50 फीसदी धनराशि केंद्र सरकार की ओर से मिलेगी। 20 फीसदी धनराशि प्रदेश सरकार और 30 फीसदी स्थानीय निकाय को खर्च करनी होगी।
तालाब का होगा पूर्ण विकास
ईओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि इस योजना के तहत तालाबों की सफाई की जाएगी। वहां अतिक्रमण हटाया जाएगा। बाउंड्रीवाल होगी, पाथ वे बनाया जाएगा, बेंच आदि लगाए जाएंगे। फाइटो और बायो रेमिडिएशन से तालाब के पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा।
तालाब विहीन पालिका नहीं भेज सकी प्रस्ताव
शासन की योजना के तहत कम से कम एक एकड़ के तालाब का चयन करना था। जनसंख्या के हिसाब से बलिया नगरपालिका में दो सरोवरों का प्रस्ताव भेजा जा सकता था, लेकिन कहीं भी एक एकड़ का तालाब नहीं है। पालिका के रिकार्ड के मुताबित उशकी सीमा में कोई तालाब ही नहीं है।