बलिया। मिनी इंड्रस्ट्रियल इस्टेट जिगनी खास के विकास के लिए भेजे गए 3.85 करोड़ के प्रस्ताव को मुख्यालय ने उद्योग विभाग को वापस कर दिया है। मुख्यालय से साफ निर्देश दिए गए हैं कि पहले औद्योगिक क्षेत्र में प्लाटों का आवंटन किया जाएगा। इसके बाद ही विकास के प्रस्ताव को स्वीकृत किया जाएगा। मुख्यालय से प्रस्ताव वापस आने से उद्योग विभाग बैकफुट पर आ गया है। अब चुनाव के बाद प्लाटों के आवंटन की रणनीति तैयार की जा रही है।
मिनी इंडस्ट्रियल इस्टेट के रूप में जिगनी खास औद्योगिक परिक्षेत्र लगभग 30 वर्ष पहले अस्तित्व में आया था। लेकिन इंडस्ट्रियल इस्टेट घोषित होने के बाद भी आज तक यहां मूलभूत सुविधाओं की बहाली नहीं हो सकी। विभागीय उपेक्षा और परिक्षेत्र की देखरेख के अभाव में अधिकांश भूखंड पर ग्रामीणों ने कब्जा जमा रखा है। तीन दशक बाद भी यहां एक भी उद्यम स्थापित नहीं हो सका है। इससे युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। करीब तीन से चार एकड़ में फैले जिगनी खास मिनी औद्योगिक परिक्षेत्र में 128 वर्गमीटर के कुल 56 प्लॉट हैं। यहां रोड, नाली, बाउंड्रीवाल, मुख्यद्वार आदि का अभाव है। इस कारण आज तक यहां कोई भी उद्यम स्थापित नहीं हो पाया है। विभागीय अधिकारी जब भी ्युवा उद्यमियों से जिगनी खास परिक्षेत्र में औद्योगिक इकाई लगाने की बात करते है तो वहां का मंजर देख लोग पैर पीछे खींच लेते हैं। एक बार विभागीय अधिकारियों ने 10-15 प्लाटों को एक ही उद्यमी को आवंटित कर दिया था। नतीजा ये हुआ कि वो वहां की भूमि पर खेती करने लगा था। जब हो-हल्ला हुआ तो आनन-फानन में आवंटन रद्द किया गया।
30 वर्ष बाद विभाग के इस औद्योगिक परिक्षेत्र की याद आई थी। विभाग ने यहां सुविधाओं की बहाली के लिए 3.85 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेजा था। उद्योग निदेशालय कानपुर से बजट आवंटन की डिमांड की गई थी। इससे यहां आरसीसी रोड के साथ नाली, बाउंड्रीवाल के अलावा मुख्य द्वार बनाने की योजना थी। प्रशासनिक भवन के अलावा पार्क के निर्माण को भी शामिल किया गया था। पेयजल की व्यवस्था पर काम होना था।, लेकिन उद्योग विभाग की ये योजना भी धराशाई हो गई है। उद्योग निदेशालय ने प्रस्ताव को बैरंग वापस कर निर्देश दिया है कि पहले प्लाटों को आवंटन कराया जाए। इसके बाद विकास के लिए प्रस्ताव भेजा जाए।