शहर कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर गांव निवासी समीर पटेल के शव घर पहुंचने पर उमड़ी लोगों की भीड़ तथ
बलिया। सिकंदरपुर में महावीरी झंडा जुलूस के दौरान मंगलवार की देर रात पुलिस की कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। लक्ष्मण अखाड़ा के जुलूस से लौट रहे अखाड़ेदारों ने पुलिस पर अचानक लाठीचार्ज का आरोप लगाया है। घटना में 10 से 12 लोगों के घायल होने की सूचना है, जबकि भगदड़ और धक्का-मुक्की में 15 से अधिक लोगों के चोटिल होने की बात कही जा रही है। घटना से आक्रोशित अखाड़ेदार पुलिस चौकी पहुंच गए और देर रात तक नारेबाजी व प्रदर्शन किया। हालांकि बाद में उन्हें समझा कर पुलिस घर भेज दी लेकिन अखाड़ेदारों ने विरोध स्वरूप 10 जुलाई को निकलने वाले भरत अखाड़ा के जुलूस को स्थगित करने की चेतावनी भी दी है।
सिकंदरपुर में वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत मुख्य महावीरी झंडा जुलूस 16 जुलाई को निकलना है। इससे पहले कस्बे के चारों प्रमुख अखाड़ों की ओर से प्रतीकात्मक जुलूस निकाले जाते हैं। मंगलवार रात मैनापुर से निकला लक्ष्मण अखाड़ा का जुलूस जल्पा चौक पहुंचने के बाद वापस लौट रहा था। अखाड़ेदारों का आरोप है कि रात करीब 12:30 बजे चुन्नीलाल गुप्ता के मकान के सामने स्थित चौक के पास पारंपरिक लाठी प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बिना किसी वजह के लाठीचार्ज कर दिया। इससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद अखाड़ेदारों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि तीन जुलाई को राम अखाड़ा का जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था, लेकिन इस बार पुलिस बगैर किसी ठोस वजह उग्र हो गई और लाठीचार्ज कर दिया। अखाड़ेदारों ने साफ कहा है कि यदि प्रशासन ने मामले में उचित कार्रवाई नहीं की तो 10 जुलाई को भरत अखाड़ा और 13 जुलाई को शत्रुघ्न अखाड़ा का जुलूस भी नहीं निकाला जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि महावीरी झंडा जुलूस के दौरान इस तरह की पुलिस कार्रवाई पहले कभी नहीं हुई। उनका आरोप है कि पहले इस संवेदनशील आयोजन की जिम्मेदारी अनुभवी अधिकारियों को सौंपी जाती थी, जबकि इस बार नए प्रभारी निरीक्षक और चौकी प्रभारी को आयोजन की परंपराओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होने से स्थिति बिगड़ गई। इस बाबत सीओ राकेश सिंह ने कहा कि इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। शाम को आखेड़दारों के साथ महावीरी झंडा जुलूस को शांति तरीके से निकालने को लेकर वार्ता हुई है।
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