हिंदू धर्म के लिए अक्षय तृतीया पर्व का बहुत ही महत्व है। इस पर्व पर लोग सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदारी करते हैं। हर साल अक्षय तृतीया पर सोच से अधिक बिक्री करने वाले दूकानदार भी लगन न होने से मायूस दिख रहे हैं। जहां सोने के भाव में उछाल से दूकानदार सोच में पड़े हुए हैं। वहीं ग्राहक भी असमंजस की स्थिति में हैं।
ग्राहकों के रुझान को देखते हुए स्वर्ण आभूषण कारोबारियों ने पूरी तैयारी की है। ग्राहकों के लिए कई ब्रांड वाले जेवरात मंगाए गए हैं। एक तरफ उत्पाद शुल्क और पैन कार्ड की अनिवार्यता के विरोध में आंदोलन के चलते सराफा कारोबारियों को काफी नुकसान हुआ, वहीं अब अक्षय तृतीया पर सोने के भाव में पिछले साल की अपेक्षा साढ़े तीन हजार रुपये प्रति दस ग्राम उछाल से अधिक खरीदारी को लेकर कारोबारी सशंकित हैं। कुछ दूकानदार इस बात को लेकर काफी चिंतित है कि लगन के दिनों में पड़ने वाला अक्षय तृतीया इस बार लगन न होने से काफी मंदी से गुजरेगी।
बैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया को अक्षय तृतीया नाम से जाना जाता है, जो इस वर्ष नौ मई सोमवार को है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया को किए जाने वाला कोई भी धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य का फल अक्षय होता है। फेफना क्षेत्र के थम्हनपुरा गांव निवासी पंडित अभय प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि इस वर्ष सोमवार के दिन अक्षय तृतीया होने से किए जाने वाले कर्म का पुण्य फल बहुत अधिक शुभ होगा। सोमवार को तृतीया का मान सायं छह बजकर 23 मिनट तक है।
इस दिन भगवान शिव पर जलधरी रखा जाता है। मीठा व्यंजन, जल से पूर्ण घड़ा, तिल, घी उपानह (जूता-चप्पल), छाता आदि का दान किया जाता है। द्विवेदी ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन गंगा स्नान सहित हरिद्वार, काशी आदि तीर्थों में स्नान का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु की प्रतिमा का चंदन आदि पदार्थों से शृंगार और पूजन का भी बहुत महत्व है। बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्रा अक्षय तृतीया के दिन से प्रारंभ की जाती है। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण की खरीदारी शुभकारी है।