सुखपुरा। क्षेत्र के किसानों के लिए खोले गए धान क्रय केंद्र अफसरों के साथ सरकारी दावे को भी मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे हैं। किसानों की हितैषी बनने वाली सरकार में किसानों का ही शोषण सर्वाधिक हो रहा है। इलाके में कई केंद्र कागजोें में भले ही खोले गए हों, लेकिन प्रशासनिक हनक के विपरीत खरीद में कोई भी धान क्रय केंद्र रुचि नहीं दिखा रहा है। अफसरों का मानना है एफसीआई के पेच में यह खरीद नहीं हो पा रही है।
धान क्रय केंद्र तो कागजों में एक माह से खोल दिए गए हैं। लेकिन किसानों के धान को खरीदने को कोई भी एजेंसी तैयार नहीं है। किसानों को विवशता में बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर धान बेचना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि भले ही सरकार ने किसानों के धान क्रय करने के लिए 1250 रुपये घोषणा करके लालीपाप दे दिया है, लेकिन उस मूल्य के सापेक्ष निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप खरीद नहीं हो पा रही है। किसान सरकार से निर्धारित मूल्य को पाने केे लिए धान को क्रय केंद्रों तक लेकर पहुंच रहे हैं तो केंद्र के प्रभारी साफ विपणन निरीक्षक से बात करने को कह पल्ला झाड़ ले रहे हैं। जिनसे सही सेटिंग नहीं हो पाती है उन्हें वाणिज्य कर अधिकारियों को सूचना देकर पकड़वा दिया जाता है। कार्रवाई से क्षुब्ध पकड़ी निवासी पारस नाथ गुप्ता ने जिलाधिकारी को पत्र देकर विभागीय उदसीनता का आरोप लगाते हुए जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।