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वन संपदा लूट, काले कानून के विरोध में धरना

Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
Ballia
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बलिया। लोक स्वातंत्र्य संगठन पीयूसीएल की जिला इकाई के सदस्यों ने बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर राजसत्ता द्वारा किए जा रहे जल, जंगल और जमीन की खुली लूट और काले कानून के विरोध में धरना दिया। इस दौरान संगठन के सदस्यों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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पीयूसीएल के प्रांतीय अध्यक्ष चितरंजन सिंह ने कहा कि राज्य सत्ता द्वारा काले कानून को हथियार बनाकर इस देश की प्राकृतिक संपदा जल, जंगल और जमीन को कारपोरेट पूंजीपतियों के हाथों लुटाया जा रहा है। जल, जंगल और जमीन पर आधारित जीवन जीने वालों को राज्य सत्ता दमन के बल पर विस्थापित करने का काम कर रही है। अकेले छत्तीसगढ़ में अभी तक साढ़े तीन लाख से अधिक आदिवासी विस्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की लूट के लिए इस देश की नई आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं। प्राकृतिक संपदाओं की खुली लूट बंद कराने के लिए आवश्यक है कि नयी आर्थिक नीतियों को वापस लिया जाए। श्री सिंह ने इस क्रम में उड़ीसा में पास्को, छत्तीसगढ़ में टाटा एस्सार और उत्तर प्रदेश में भट्ठा पारसौल, दादरी परियोजना को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान संसद इस लूट को शह देने के लिए मूक दर्शक की तरह काले कानून को बनाने में सहभागी है। श्री सिंह ने कहा कि इसके लिए आवश्यक है कि जनता से संवाद कर जनचेतना विकसित की जाए। विभिन्न जनसंगठनों के नेताओं ने कहा कि पूंजीवादी राजनीति और नयी आर्थिक नीतियों का दुष्परिणाम है प्राकृतिक संसाधनों की लूट। धरना सभा में रामप्यारे सिंह, डा. अखिलेश सिन्हा, अरुण सिंह, रमाशंकर तिवारी, जेपी सिंह, लक्ष्मण यादव, सुरेंद्र कुमार सिंह, रामकृष्ण यादव, मुनी सिंह, प्रदीप सिंह, गोपाल सिंह, अमित, राकेश आनंद, सूर्य प्रकाश सिंह, ज्योति स्वरूप पांडेय, गिरिजेश गुप्ता, अनिल कुमार सिंह, संजीव कुमार डंपू, रणवीर सिंह सेंगर, जर्नादन सिंह, बलवंत यादव, बागिश पांडेय, असगर अली, पारस नाथ यादव, राममूर्ति, अजय घुसिया, सरस्वती, सुधाकर सिंह, संतोष यादव, इमाम हुसैन, पंकज राय आदि शामिल रहे। संचालन एडवोकेट रणजीत सिंह ने किया।
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