चिलकहर (बलिया)। सरकारी फरमान सिर्फ कागजों में ही पूरा होता है। चिलकहर विकास खंड के कुंटुब रजिस्टर इसका ज्वलंत प्रमाण बन गया है। वर्ष 2010-2011 में शासन का आदेश हुआ था कि परिवार रजिस्टर की नकल आनलाइन कर दी जाएं। बजट के आड़े आने से फरमान पर अमल तो नहीं हो सका, लेकिन कुंटुब रजिस्टर को दुरुस्त करने की जहमत भी नहीं उठाई गई। यही कारण है कि अनेक लोग मरने के बाद भी कुटुंब रजिस्टर में जीवित हैं।
विकास खंड में कुल 62 गांव हैं। इनमें निवास प्रमाणपत्र बनवाने, बैंकिंग कार्य सहित विभिन्न कार्यों के समय से निष्पादन के लिए सचिवों को रखा गया। इन्हीं सचिवों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को परिवार रजिस्टर उपलब्ध कराना होता है। इसके लिए गांवों में पंचायत भवन बनाकर सचिवों के बैठने की व्यवस्था की गई है। लेकिन सचिव न तो पंचायत भवन पर मिलते हैं और न ब्लाक मुख्यालय पर। ऐसे में परिवार रजिस्टर की व्यवस्था शासन की मंशा के अनुरूप आनलाइन नहीं हो सकी और जरूरतमंदों को सचिव के घर से लेकर ब्लाक मुख्यालयोें का चक्कर काटना मजबूरी बन गया है।
शासन स्तर परिवार रजिस्टर की नकल तथा नए नाम का पंजीकरण और मृतक का नाम कुटूंब रजिस्टर से निकालने के लिए मात्र दो रुपये की दरख्वास्त देनी होती है। इसी कार्य को करने के लिए सेक्रेटरी प्रति पीडि़त को पांच दिन दौड़ाने के बाद 100 से 200 रुपये ले लेते हैं। आनाकानी पर सीधा जवाब होता है कि जब तक खंड विकास अधिकारी द्वारा आदेशित नहीं किया जाएगा, परिवार रजिस्टर की नकल नहीं दी जा सकेगी। यहां तक पैसे नहीं मिलने की दशा में यही सेक्रेटरी कई महीने जांच के नाम पर दौड़ाते रहते हैं। हालाकि विकास खंड के मृतक एवं जन्म के आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो करीब 50 फीसदी ऐसे लोग है जो मृतक होने के बाद भी परिवार रजिस्टर में जीवित है। कहीं-कहीं तो बैंक उत्तराधिकार प्रमाण जारी कराने के कोर्ट से संबंधित मामलों में कुटुंब रजिस्टर की नकल बंटाधार ही कर देता है।
इनसेट
शासन से परिवार रजिस्टर को आनलाइन करने के लिए फरमान तो जारी किए गए थे लेकिन बजट न आने के चलते इस योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। मृत्यु एवं जन्म प्रमाण पत्र के बारे में कोई शिकायत हमें नहीं मिली है। अगर कोई सेक्रेटरी पैसा मांगता है उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-जनार्दन प्रसाद शाही, जिला पंचायत राज अधिकारी बलिया